संवाद सहयोगी, टूंडला: मौत से पहले परिवार की खुशहाली के लिए युवक ने बीमा कराया। अब पति की मौत के बाद पत्नी क्लेम के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है। युवक की सड़क हादसे में मौत हो गई। किश्त जमा करने के लिए दी गई धनराशि को एजेंट ने जमा नहीं किया। इसके चलते अब बीमा कंपनी मुआवजा देने से इंकार कर रही है। पीड़िता ने एजेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर के गढाईपुरा विड़ला नगर निवासी बंटी राठौर पुत्र बच्चू ¨सह राठौर ने वर्ष 2013 में एलआइसी एजेंट प्रेम ¨सह राठौर पुत्र किताब ¨सह राठौर निवासी गांव जरौलीकलां थाना टूंडला के माध्यम से मनी बैक पॉलिसी कराई थी। प्रत्येक किश्त एजेंट के द्वारा जमा कराई जाती रही। बीच में वह चार किश्त जमा नहीं कर सका। उस दौरान एजेंट ने किश्त की बकाया धनराशि जमा न करने पर पॉलिसी समाप्त करने की बात कही। पत्नी ज्योति राठौर का कहना है कि उस दौरान उसके पति ने दूसरे से कर्ज लेकर किश्त के 15 हजार रुपये एजेंट को दे दिए थे लेकिन एजेंट ने रुपये जमा नहीं किए। 25 मई को बंटी का एक्सीडेंट हो गया जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पत्नी ने पति का एक्सीडेंट होने की जानकारी एजेंट को दी। इसी बीच एजेंट ने 30 मई को किश्त एलआइसी में जमा करा दी। उपचार के दौरान 17 जून को घायल की मौत हो गई। पति की मौत के बाद पत्नी एलआइसी कार्यालय पहुंची, जहां मुआवजे की मांग की। इस पर अधिकारियों ने बकाया किश्त हादसे के बाद जमा कराए जाने की बात कहते हुए दुर्घटना बीमा देने से इन्कार कर दिया। पीड़िता का कहना है कि उनके तीन छोटे बच्चे हैं। वह उनका भरण पोषण कैसे करेगी। महिला ने एजेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने एजेंट के विरुद्ध तहरीर दी है। इंस्पेक्टर मुनीश चन्द्र का कहना है कि तहरीर मिल गई है। मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran

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