फतेहपुर: खेलों के प्रति सरकारों के उदासीनतापूर्ण रवैये का दर्द प्रशिक्षकों के मुख से अनायास ही निकल पड़ा वैश्विक महामारी महामारी में खेल गतिविधियां शून्य होने के बाद खेल प्रशिक्षकों की कमाई भी बंद हो गई लेकिन जब उनसे उनके दर्द के बारे में पूछा गया तो पहले वह खेलों के प्रति शासन-प्रशासन के रवैये पर अपना दर्द बयां करने लगे। ज्यादातर खेल प्रशिक्षकों ने प्रत्येक विकास खंड क्षेत्र में एक खेल स्टेडियम की जरूरत बताई, साथ ही खेल गतिविधियों को निरंतर गतिमान रखने के लिए प्रत्येक स्कूल में खेल की कक्षा संचालित करने के साथ गांव-गांव खेल मैदान की व्यवस्था करवाने की बात कही।

Posted By: Jagran

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