जागरण संवाददाता, फतेहपुर : बारिश आ गई और पानी की बूंद सहेजने का इंतजाम नहीं हो पाया। अवैध कब्जा और गंदगी से पटे तालाबों को संरक्षित करने प्रति जिस तरह से अनदेखी की जा रही है। इससे यह तय है कि इस बारिश के पानी को भी हम सहेज नहीं पाएंगे। आधे शहर के पानी संचयन की क्षमता रखने वाले नवइया तालाब की तस्वीर यह बता रही कि कि तालाब के आधे के अधिक क्षेत्रफल पर कब्जा हो चुका है, जो बचा भी है उसे कूड़ा डाल कर पाटा जा रहा है। प्रशासन व नगर पालिका जल संचयन के प्रति गंभीर नहीं है जिससे तालाबों का पुरसाहाल नहीं हो पा रहा है।

तलाबों में पानी के संचयन की क्षमता लगातार कम होने से बारिश में जलभराव की समस्या गहराती जा रही है। बारिश का पानी नालियों से बहकर चला जाता है जिससे भू-गर्भ का जलस्तर भी गिरता जा रहा है। राजस्व रिकार्डों में देखा जाए तो शहर में पचास से अधिक तालाब है, लेकिन इस समय मौके पर आठ से दस तालाब की बचे है। महिला डिग्री कालेज के पास स्थित नवइया तालाब के चारों ओर बस्ती का गंदा पानी व कूड़ा तालाब में डाला जा रहा है। पिछले एक दशक में तालाब का बड़ा हिस्से में मकान खड़े हो गए है। युवक मंगल दल टीसी के अध्यक्ष राजेंद्र साहू ने कहा कि शहर के तालाबों को सहेजने के कोई प्रयास न हो से बारिश का पानी बर्बाद हो जाता है। तालाबों का सीमांकन न कराए जाने से भू-माफिया कब्जा कर रहे है,राजस्व विभाग व नगरपालिका की संयुक्त टीम पैमाइश कर पहले सभी तालाबों का सीमांकन कराएं।

बृजराज सिंह ग्रामीण क्षेत्र में तो मनरेगा से तालाबों की खोदाई कराने का विकल्प है लेकिन शहर में तालाबों के रख-रखाव के प्रति एक पैसा का बजट नहीं रहता जिससे तालाब उपेक्षित हैं।

मो. यासीन शहर के तालाबों में हो रहे कब्जे को संज्ञान में लेकर कार्रवाई की जा रही है। पालिका के माध्यम से तो कोई शिकायत नहीं मिली लेकिन लेखपालों को लगाकर तालाबों के अवैध कब्जेदारों की सूची तैयार की जा रही है।

प्रमोद झा, उपजिलाधिकारी सदर

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