फतेहपुर [गोविंद दुबे]। पति की अकाल मौत, तीन छोटे बच्चे, महज तीन बीघा जमीन और सहारा कोई नहीं। फतेहपुर, उप्र के खजुहा ब्लाक के शाहजहांपुर (मझिलेगांव) गांव की ननकी देवी का हौसला इन मुसीबतों से बड़ा निकला। इसी हौसले के बूते तीनों बच्चों को शिक्षित करने का सपना देखा और उसे मूर्त रूप देने के लिए खुरपी, कुदाल व फावड़ा उठा लिया।

खेतों पर काम कर बच्चों को अच्छी

परवरिश दी। मेहनत का फल मिला और आज बेटा वायुसेना में नॉन कमीशंड अफसर के पद पर तैनात है। ननकी देवी के पति कमलेश की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। 20 साल पहले हुए इस हादसे ने ननकी को बुरी तरह तोड़ दिया। पति के नाम पर मात्र तीन बीघे पैतृक जमीन थी और तीन छोटे बच्चों की परवरिश का जिम्मा। सबसे बड़ा पुत्र राहुल उस समय महज नौ वर्ष का था। वहीं दूसरा पुत्र सात वर्ष और तीसरा तीन बरस का था। बुलंद इरादों वाली ननकी ने हार नहीं मानी और तीनों पुत्रों को शिक्षित कर बुलंदियों तक पहुंचाने के लिए मेहनत-मजदूरी की।

तीन बीघे खेत में सब्जियों की खेती करने के साथ पशुपालन अपनाया। मेहनत का ही प्रतिफल रहा कि बड़ा पुत्र भारतीय वायु सेना में तकनीकी अफसर पद पर नियुक्त हो गया। अब बहू अनु पटेल भी परिषदीय स्कूल में शिक्षिका के पद पर हैं। दो अन्य पुत्र अर्थ उत्तम व अंकित उत्तम बीएससी करने के बाद इलाहाबाद में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

मां के साथ करता हूं खेतों में काम

वायुसेना में तैनात राहुल उत्तम कहते हैं कि सफलता असफलता से बढ़कर मां का बेटा होना मेरे जीवन की सार्थकता है। आज भी छुट्टियों में मैं मां के साथ खेतों पर काम करता हूं। उससे जो खुशी मिलती है वो बयां करना मुश्किल है। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal