जागरण संवाददाता, फतेहपुर : आठ वर्षीय मासूम इशिका उर्फ पलक के अपहरण बाद हत्या के मामले और शव को फ्रिज में छिपाने के मामले में गुरुवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जुनैद मुज्जफ्फर की अदालत ने संदीप कुमार , उसकी पत्नी पिकी और बहन सेवानिवृत सिपाही आशा कुमारी को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने संदीप पर दो हजार रुपये, पिकी पर पांच हजार रुपये रुपये व बहन पर 7500 रुपये अर्थदंड लगाया है।

शहर के जयरामनगर के रिटायर्ड वन दारोगा राज बहादुर सिंह की पौत्री व बृजेश सिंह की पुत्री पलक चार मार्च 2015 की शाम छह बजे आइसक्रीम लेने दुकान गई थी, तभी पड़ोसी संदीप ने पलक को घर बुलाया और दरवाजा बंद कर लिया। इसके बाद उसे धारदार हथियार से हत्या कर शव को दो दिन फ्रिज में रखे रखा। तीसरे दिन बोरी में भरकर शव को टावर के पास फेंक दिया था। अचानक बच्ची के गायब होने पर स्वजन खोजबीन करते रहे। बच्ची के बाबा ने चार मार्च को ही रात साढ़े 10 बजे थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी थी। घटना के तीन दिन बाद घर के पिछवाड़े टावर के पास एक बोरी में शव बरामद हो गया। बोरी में पड़े नंबर को देखकर आटा चक्की में तफ्तीश किया तो मालूम हुआ कि यह बोरी पड़ोसी संदीप के घर की है। इस पर पड़ोसी से सख्ती से पूछताछ की तो उसने जुर्म स्वीकार कर लिया। जिला शासकीय अधिवक्ता सहदेव गुप्ता व अपर जिला शासकीय अधिवक्ता रघुराज सिंह, बलिराज उमराव ने अदालत में दोषियों के खिलाफ सबूत पेश करते हुए दलीलें रखीं।

शहर भर में था गुस्सा, लगाया था जाम

जयरामनगर में आठ साल की मासूम बच्ची की जिस निर्दयता से हत्या कर शव फेंका गया उससे पूरे शहर में गुस्सा था। होली के दूसरे दिन बच्ची पलक का शव मिला तो मुहल्लेवासियों ने जाम लगा दिया। हत्यारों को फांसी देने की मांग करते रहे। पुलिस ने उसी दिन छापामार घर से दंपती समेत उसकी बहन जो उस समय सिपाही के पद पर कार्यरत थी को जनता के रोष को बचाते हुए जेल भेज दिया था।

आरोपितों को नहीं मिली थी जमानत

पलक के हत्यारों में दंपती व उनकी सिपाही बहन को कोर्ट से जमानत नहीं मिली। गिरफ्तारी के बाद से ही सभी जेल में बंद है। गुरुवार को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई तो तीनों आरोपित न्यायालय परिसर में ही फफक-फफक कर रोने लगे। बताया गया कि बहन सिपाही वर्ष 2011 में सेवानिवृत हो गई थी।

फफक पड़ी मां, बोली बेटी को मिला इंसाफ

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पलक के हत्यारों को जैसे ही उम्रकैद की सजा सुनाई, जयराम नगर स्थिति मृतक पलक के घर में खुशी के दीये जलने लगे। मां सुरेखा ने दौड़कर पांच वर्ष की बेटी गौरी व तीन साल की पीहू को गले लगाया और बोली आज तुम्हारी दीदी का इंसाफ मिल गया। पड़ोसियों ने सजा पर खुशी प्रकट किया।

पिता बृजेश सिंह ने बताया कि अंधविश्वास और तंत्रमंत्र के चक्कर में बेटी की जान चली गई। हत्यारों ने शरीर के सफेद दाग ठीक होने के चलते बेटी को मौत के घाट उतार दिया। उन्होंने जैसी करनी की न्यायालय ने उन्हें वैसी ही सजा सुना दी। दोपहर बाद जैसे ही बाबा राज बहादुर ने फैसले की खबर घर पहुंचाई परिवार ने एक बार फिर मृतक पलक की फोटो को निकाल कर देखा। बेटी के फोटो पर टीका कर स्वजन बोले आज तुम्हारी लड़ाई पूरी हो गई। बता दें कि रिटायर्ड वन दारोगा एक इकलौते पुत्र बृजेश सिंह सामान्य व्यक्ति हैं। वह एक मोबाइल फोन की दुकान चलाकर गुजर बसर करते हैं। वर्तमान में 17 वर्षीय एक बेटा व गौरी-पीहू नाम की दो बेटियां है। मृतक भाई से छोटी और दो बहनों से बड़ी थी। आज भी परिवार के लोग उसकी बातों को याद कर रोते हैं। बाबा के अनुसार पलक होनहार थी और शुरू से ही होशियार थी।

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