जागरण संवाददाता, फतेहपुर: गोशालाएं स्थाई निर्माण पर नहीं बल्कि चरवाहा पद्धति पर संचालित होगी। जिले की जिन गोशालाओं में स्थाई निर्माण हो रहा है उनमें तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है, अब लोहे के खंभों पर टीन शेड डाले जाएंगे। शासन के नए निर्देश के बाद जिले में मकर संक्रांति पर गोशाला संचालन की तैयारी पर बड़ा झटका लगा है। अब मंगलवार को जिले की कोई गोशाला प्रारंभ नहीं होगी बल्कि नए निर्देश के क्रम में 15 दिन अतिरिक्त समय लगाकर गोशालाओं को तैयार कर संचालित किया जाएगा।

जिले में अलग-अलग 15 स्थानों पर गोशालाओं का निर्माण प्रारंभ है। रारा व देवलान की गोशाला लगभग तैयार हो गयी है, प्रशासन की तैयारी थी कि इन्हें मंगलवार को प्रारंभ कर दिया जाए, लेकिन अब प्रमुख सचिव पशुपालन विभाग ने गोशाला निर्माण की गाइड लाइन जारी कर दी है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि गोशाला निर्माण के लिए स्थाई निर्माण पर पाबंदी लगाई गयी है। रारा व देवलान की गोशालाएं ऐसी है जहां प्रशासन की देखरेख में टीन शेड बनाने के लिए पक्की ईंट- सरिया व आरसीसी युक्त खंभों का निर्माण किया गया है। पीडब्लूडी की रिपोर्ट के अनुसार सरियायुक्त आरसीसी खंभे भी स्थाई निर्माण की श्रेणी में आते हैं, इस लिए इन्हें हटाकर लोहे के पाइप लगाकर टीन शेड डाला जाए। डीएम आंनजेय कुमार ¨सह ने बताया कि शासन के निर्देश के अनुपालन में हमने निर्माण वाले कामों पर रोक लगा दी है, जिन स्थानों पर पक्का निर्माण हो गया है हम उसे गिराएंगे और शासन की मंशानुसार ही कार्य कराया जाएगा। क्या है चरवाहा पद्धति

-डीएम के अनुसार संचालित होने जा रही गोशालाओं में अब पंचायतों के जरिए चरवाहे संविदा पर रखे जाएंगे। यह चरवाहे गोशाला के अंदर जहां पशुओं की देखरेख करेंगे वहीं प्रतिदिन इन्हें गोशाला के आसपास पहले से चिन्हित पशुचर की जमीनों पर इन्हें चराने के लिए ले जाएंगे, इसके बाद इन्हें पुन: गोशाला लाएंगे। चरवाहों को प्रतिमाह मानदेय ग्राम सभा से दिया जाएगा।

Posted By: Jagran

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