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इलेक्ट्रिक चाक से मिली सहूलियत, मिट्टी के दीये-कलश और खिलौने बनाने में जुटे कुम्हार

Published: Mon, 26 Oct 2026 10:20 AM (IST)

दीपावली के लिए फतेहपुर में कुम्हारों द्वारा मिट्टी के दीये और कलश बनाने का काम तेजी से चल रहा है। ...और पढ़ें

एआई जनरेटेड तस्वीर।

एआई जनरेटेड तस्वीर।

HighLights

  1. फतेहपुर में दीपावली के लिए मिट्टी के दीये बन रहे।

  2. कुम्हारों के चाक दिन-रात चल रहे, बढ़ी आमदनी।

  3. इलेक्ट्रिक चाक से कलात्मक दीये बनाना हुआ आसान।

जागरण संवाददाता, फतेहपुर। दीपावली की तैयारियां चारों तरफ दिखाई देने लगी हैं। दीपावली के पर्व पर घरों को परंपरागत मिट्टी के दीयों से सजाने का सपना संजोया गया है।

इसी सपने के आधार पर कुम्हारों के चाक सुबह से शाम तक चलने लगे हैं। कच्ची मिट्टी को तैयार करना, चाक पर दीपों सहित सामग्री को आकार देना, उन्हें सुखाना और उन्हें पकाना दिनचर्या में शामिल हो गया है।

आने वाले दिनों में दिनभर की मेहनत आमदनी में बदलने वाली है। कुम्हार (प्रजापति समाज) के घरों के लोग काम में व्यस्त हो गए हैं। दीपावली के पर्व पर मिट्टी के दीये, कलश, करवा सहित खिलौने प्रमुख रूप से बनाए जा रहे हैं। अब इलेक्ट्रिक चाक से कुम्हारों को सहूलियत मिल गई है और वे कलात्मक दीयों को बनाने में मशगूल हैं।

शहर के मुराइन टोला और सदाशिव टाकीज के समीप जीटी रोड में कुम्हारी कला का प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही शहर से लेकर गांव तक प्रजापति समाज के दरवाजों पर कच्ची मिट्टी का काम तेजी से चल रहा है। कला में निपुण परिवार हाथ बंटाने में व्यस्त हो गए हैं।

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गांवों से चिकनी मिट्टी को ट्रालियों में बनवाया जा रहा है। मिट्टी को गीली करके उसे आकृति देने योग्य बनाया जा रहा है। गोबर के कंडों में कच्चे दीयों आदि को पकाने के लिए गोबर के कंडों का उपयोग हो रहा है। इन कारीगरों की मानें तो 80 से 100 रुपये प्रति सैकड़ा छोटे दीपक, 20 से 50 रुपये में बड़ा दियाला, 50 से 100 रुपये में साइज के अनुसार कलश की बिक्री की जाती है।

कभी हाथ से चाक चलाया जाता था, अब इलेक्ट्रिक चाक बाजार में आ गया है। शासन की योजना के मुताबिक अभी तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला है, जिसके चलते हाड़तोड़ मेहनत करके कच्ची मिट्टी से दीये, बर्तन आदि बनाए जा रहे हैं।

राम विशाल प्रजापति

परंपरागत काम को परिवार सहित अंजाम दिया जा रहा है। दीपावली में इसकी मांग बढ़ जाती है और जीविकोपार्जन के लिए धनराशि मिल जाती है। दीवाली के पर्व पर आर्डर भी मिलने शुरू हो चुके हैं। आर्डर के साथ लोग घर आकर भी सामग्री की खरीदारी कर लेते हैं।

राहुल प्रजापति

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