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ग्रीन एनर्जी की ओर फतेहपुर जिला अस्पताल का कदम, सोलर प्लांट से ग्रिड को मिलेगी बिजली; बचेंगे लाखों रुपये

Published: Sat, 17 Oct 2026 10:38 PM (IST)

फतेहपुर जिला अस्पताल ने 1.50 करोड़ रुपये की लागत से 410 किलोवाट का ग्रीन एनर्जी सोलर प्लांट स्थापित किया है। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. 1.50 करोड़ रुपये में 410 किलोवाट सोलर प्लांट स्थापित।

  2. प्रतिदिन चार हजार यूनिट बिजली उत्पादन की क्षमता।

  3. बचत राशि से चिकित्सा सुविधाएं होंगी बेहतर।

जागरण संवाददाता, फतेहपुर। जिला अस्पताल अब बिजली बिल पर होने वाले खर्च में कटौती कर बची धनराशि से मरीजों के लिए चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए अस्पताल परिसर में 1.50 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन एनर्जी प्लांट स्थापित किया गया है। इसकी क्षमता 410 किलोवाट है, जो प्रतिदिन करीब चार हजार यूनिट बिजली उत्पादन कर सकता है।

अस्पताल में वर्तमान में हर महीने लगभग 80 हजार यूनिट बिजली की खपत होती है, जिसके लिए 9.27 लाख रुपये का बिल चुकाना पड़ता है। सोलर प्लांट से ग्रिड को दी जाने वाली बिजली के समायोजन से बिल में भारी कमी आएगी। इससे बचने वाली धनराशि का उपयोग चिकित्सा उपकरणों, दवाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा।

कार्यदायी संस्था ओएमसी प्राइवेट लिमिटेड ने प्लांट में 482 वाट क्षमता के 702 सोलर पैनल लगाए हैं। इन पैनलों से सूर्य की रोशनी के जरिए बिजली का उत्पादन होगा। उत्पादित बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए 110 किलोवाट क्षमता के दो और 60 किलोवाट क्षमता का एक इनवर्टर लगाया गया है। ग्रिड को भेजी गई बिजली का समायोजन होने से अस्पताल की बिजली खपत के बिल में कमी आएगी। इससे अस्पताल प्रशासन पर बिजली खर्च का आर्थिक बोझ घटने की उम्मीद है।

कार्यदाई संस्था 25 वर्ष तक प्लांट की करेगी देखरेख
कार्यदायी संस्था ओएमसी प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारी 25 वर्ष तक सोलर प्लांट का रखरखाव करेगी। पैनलों की समय-समय पर सफाई की जाएगी। तकनीकी खराबी आने पर संस्था के कर्मचारी उसे दुरुस्त कर बिजली आपूर्ति बहाल करेंगे। यह अनुबंध अस्पताल प्रशासन और कार्यदाई संस्था के बीच हुआ है।

“सोलर प्लांट लगने से जिला अस्पताल के बिजली बिल में कमी आएगी। ग्रिड को दी जाने वाली बिजली का समायोजन होने से बिल में राहत मिलेगी। इससे अस्पताल के अन्य जरूरी संसाधनों पर खर्च करने के लिए धनराशि उपलब्ध हो सकेगी।” — डॉ. राजेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक

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