जागरण संवाददाता, फतेहपुर : यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया तो ऑनलाइन होती है लेकिन डाटा अपडेशन का काम जिले से ही किया जाता है। अपर मुख्य सचिव ने डीआइओएस को निर्देशित किया है कि इनका भौतिक सत्यापन खुद करें और जिला चयन समिति से भी करा लें। संसाधनों से लैस विद्यालय ही केंद्र बनाए जाएंगे। प्रधानाचार्यों द्वारा अपलोड किए जाने वाले डाटा को भली भांति जांच कर लें। डीआइओएस ने प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया है कि केंद्र निर्धारण के मानकों समय रहते पूरा कर लिया जाए।

बोर्ड परीक्षा की तैयारियां दिनों दिन परवान चढ़ती जा रही हैं। इन केंद्रों के प्रमुख मानकों में परीक्षा कक्ष के दोनों तरफ सीसीटीवी का होना, खिड़की दरवाजे दुरुस्त होना, प्रधानाचार्य कक्ष में लगे डीवीआर की क्षमता कम से कम 30 दिनों की रिकार्डिंग होना, बिना बाधा वाली इंटरनेट सेवा होना, मुख्य गेट से कैंपस में हर तरफ सीसीटीवी की निगरानी, विद्यालय तक पहुंचने के लिए पक्का मार्ग, चहारदीवारी, प्रश्नपत्र के लिए लोहे के बॉक्स अथवा अलमारी डबल लॉक युक्त, 24 घंटे प्रहरी की व्यवस्था, विद्यालय में उपलब्ध फर्नीचर के अनुसार परीक्षार्थी धारण क्षमता आदि हैं।

डीआइओएस महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रधानाचार्यों द्वारा अपलोड किए जाने वाले डाटा का दोहरा सत्यापन कराने के निर्देश हैं। एक सत्यापन विभाग द्वारा होगा जबकि दूसरा सत्यापन डीएम के द्वारा कराया जाएगा। एक भी बिदु में विद्यालय के खरे न उतरने पर केंद्र निर्धारण सूची से बाहर कर दिया जाएगा। अपलोड डाटा के अनुसार ऑनलाइन पद्धति से केंद्र निर्धारण होगा।

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