जागरण संवाददाता, फतेहपुर : ईद उल अजहा (बकरीद) मुस्लिम समुदाय का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। यह हजरत ए इब्राहिम की सुन्नत के तौर पर मनाया जाता है इसमें अल्लाहताला की रजामंदी के लिए जानवरों की कुर्बानी कराई जाती है। कहते हैं कि हजरत इब्राहिम

को ख्वाब में अल्लाह ताला ने दो मर्तबा हुक्म दिया कि वह अपनी सबसे प्यारी चीज को अल्लाह की राह में कुर्बान करें। सुबह उठकर हजरत ए इब्राहिम ने इसका जिक्र अपनी पत्नी हजरते हाजरा से किया। उसके बाद अल्लाह की राह में उन्होंने इकलौते बेटे हजरते इस्माइल की रजामंदी पर उनकी कुर्बानी दी लेकिन उनकी जगह अल्लाह ने भेंड़ भेज दी जिससे उसकी कुर्बानी हो गई।

काजी-ए-शहर मौलाना कारी फरीदउद्दीन कादरी ने कहा कि पनी स्थित मोचियाने वाली मस्जिद में 22 अगस्त को सुबह साढ़े आठ बजे ईद उल अजहा की नमाज अदा कराई जाएगी। चांद की तारीखों 10,11 व 12 को अल्लाह की रेजा के लिए जानवरों की कुर्बानी करें। किसी प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी कतई न करें। गरीब व मजलूमों की मदद करें।

ईदगाह में सुबह साढ़े 8 बजे नमाज

फतेहपुर : काजी-ए-शहर अब्दुल्लाह शहीदुल इस्लाम ने मुस्लिम समुदाय का आह्वान किया कि 22 अगस्त बरोज बुधवार को ईदुल अजहा बकरीद पर्व मनाया जाएगा। ईदगाह में उसी दिन सुबह 8:30 पर ईदुल अजहा की नमाज अदा कराई जाएगी। कुर्बानी कराने वाले को उस जानवर के बदन पर मौजूद हर बाल के बराबर नेकी कुबूल होती है।

Posted By: Jagran

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