जागरण संवाददाता, फतेहपुर : लोकसभा चुनाव के पूर्व अंतिम रेलबजट को लेकर जिलेवासियों में खासी उत्सुकताएं थी। लंबे समय में मुंबई, अजमेर, अहमदाबाद, लखनऊ के लिए ट्रेनों की मांग की जाती रही है। इसके अलावा जिले से गुजरने वाली कई गाड़ियों के स्टापेज भी विभिन्न संगठनों से मांगे जाते रहे हैं। गुरुवार को बजट में लोग टकटकी लगाकर तोहफा मिलने की जानकारी जुटाते रहे। नई ट्रेनों के न चलाए जाने और ठहराव जैसी घोषणाएं न किए जाने से लोगों ने टीवी पर आधा अधूरा बजट देखकर इतिश्री कर ली। दिल्ली में बजट पेश होने के बाद जिले को क्या मिला इस पर बहस होती रही।

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प्रतिक्रियाएं

- रेलवे के बजट में गाड़ियों के ठहराव और सुविधाओं में इजाफे की आशा थी लेकिन बजट देखने से वह पूरी नहीं हो पाई है। जिले को क्या मिल है इसकी जानकारी जुटाने के बाद तस्वीर साफ नहीं हो पाई है।

गुरमीत ¨सह, युवा

- जिले का रेलवे स्टेशन आदर्श की श्रेणी में है बजट में आदर्श रेलवे स्टेशनों को क्या मिला यह पता नहीं चल पाया है। 3600 रेलवे स्टेशन के उच्चीकरण और वाई फाई जैसी सुविधाएं मिल जाएं तो बेहतर होगा।

आनंद मौर्य, दैनिक यात्री

- हावड़ा दिल्ली रेलमार्ग में बसे इस रेलवे स्टेशन की दशा सुधारे जाने की आशाएं थी। किराए में बढ़ोत्तरी न करने से यात्रा को कष्टकारी बनाने से रोका गया है तो जिले को मिलने वाले तोहफे से रेलबजट ने मायूस किया है।

अंकित कुमार शर्मा, छात्र

- रेलयात्रा को भविष्य में सुगम बनाने की योजनाएं तो समझ में आईं लेकिन तत्कालित लाभ की बात करें तो जिले को हाईटेक सुविधाएं से वंचित रखा गया है। चुनाव के ऐनवख्त पर जारी होने वाले बजट में खासी आशाएं थी।

हबीबुल इस्लाम, चिकित्सक

- रेलवे की यात्रा में उमड़ रही भीड़ को देखते हुए नई ट्रेनें नहीं चलाई गईं। इसके साथ ही जिले में ट्रेनों की बहुत पुरानी मांगों पर भी रेलबजट खरा नहीं उतर सका है। ऐसी दशा में अब नई सरकार के गठन के बाद सुविधाओं के लिए इंतजार करना होगा।

सतीश ¨सह, व्यापारी

- रेलवे स्टेशन में आरओ वाटर, वाहन स्टैंड, साउथ सिटी का डेवलपमेंट, यात्री शेड का निर्माण आदि की सख्त जरूरत है। बजट में इन सुविधाओं को दरकिनार करके जिलेवासियों को मायूस किया गया है।

सूघर लाल यादव, अधिवक्ता

Posted By: Jagran