खोया में आलू-शकरकंद और पनीर में केमिकल स्टार्च की मिलावट, रक्षाबंधन से पहले मार्केट में धड़ल्ले से बिक्री
फतेहपुर में दूध उत्पादन कम होने से खोया और पनीर में मिलावट का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को खतरा है।

HighLights
फतेहपुर में दूध उत्पादन कम, मिलावटी खोया-पनीर का धंधा तेज।
आलू, शकरकंद, केमिकल स्टार्च से बन रहे नकली उत्पाद।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल, लोग बीमार।
जागरण संवाददाता, फतेहपुर। दूध से ही खोया, पनीर बनता है, लेकिन जिले में आपूर्ति के सापेक्ष दूध का उत्पादन कम हो रहा है। ऐसे में खोया व पनीर में मिलावट का धंधा खूब चमक रहा है।
शादी ब्याह के सीजन से लेकर मिष्ठान भंडारों में इस मिलावटी खोया व पनीर की बिक्री धड़ल्ले से चल रही है। अंधेर यह है कि मिलावट पकड़ने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग मिलावट खोरों पर शिकंजा तक नहीं कस पा रहा है। ऐसे में मिलावटी खोया व पनीर के सेवन से लोग बीमारियों को आमंत्रित कर रहे हैं।
जिले में नकली पनीर और खोया बनाने का काम धड्ल्ले से हो रहा है। सूत्रों के अनुसार विभागीय मिलीभगत के कारण इन दुकानदारों की सैंपलिंग तो होती है पर जांच में नमूना फेल नहीं होता है। इसलिए मिलावट का धंधा खूब फल फूल रहा है। जिले में लगभग 80 से अधिक दुकानें संचालित हो रही है जहां से सिर्फ खोया और पनीर की थोक बिक्री की जा रही है।
मिलावटी सामग्री बेंच कर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। त्योहार के समय यह धंधा और तेजी से शुरू हो जाता है। अलग-अलग डेयरी इस काम में पूरी तरह से संलिप्त हैं, लेकिन बढ़ती जरूरत के बीच कम उत्पादन के कारण मजबूरी में लोग मिलावटी सामग्री खरीद कर सेवन कर रहे हैं।
खोया में आलू व शकरकंद की मिलावट
खोया का वजन बढ़ाने के लिए और इसमें गाढ़ापन लाने के लिए मुख्य रूप से मैदा, सूजी, उबले हुए आलू व शकरकंद की मिलावट आम बात हो गयी है। वहीं अब केमिलल युक्त स्टार्च भी मिलावट के लिए विकल्प बन गया है। कई बार तो दूध में ही पामआयल मिलाकर दूध को बेहतर बना दिया जाता है और इसी दूध को खरीद कर लोग खोया बनाते हैं।
पामोलिन व रिफाइंड के साथ सल्फ्यूरिक एसिड तक मिलाते
वर्तमान में सबसे अधिक मिलावट पनीर की बिक्री में हो रही है। दूध के प्राकृतिक पैट को निकालकर उसमें सस्ते पाम आयल या रिफाइंड तेल की मिलावट की जाती है। इसके अलावा स्किम्ड मिल्क पाउडर व स्टार्च मिलाकर भी पनीर बनाई जाती है।
केमिकल स्टार्च का घोल सिर्फ पानी में मिलाने पर पनीर तैयार हो जाती है और लोग इसे असली समझकर चाव से खाते हैं। दूध को जल्द फाड़ने के लिए सल्फ्यूरिक एसिड व अन्य रसायनों का प्रयोग होता है, जोकि सेहत के लिए बेहद हानिकारिक है।
मिलावट की रोकथाम को लेकर निरंतर अभियान चलाया जा रहा है, बीते एक वर्ष में 25 से अधिक कार्रवाईयां की गयी है। जहां जहां भी दूध, खोया और पनीर का व्यापार हो रहा है, हम वहां नमूना लेकर जांच करेंगे और मिलावट मिलने पर कार्रवाई करेंगे।
-बीएस कुशवाहा, सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय
इस तरह करें आयोडीन टेस्ट
पनीर के टुकड़े को उबालकर उस पर आयोडीन की दो से तीन बूंदे डाले, यदि रंग नीला या काला हो तो उसमें स्टार्च या मैदा मिलावट की पुष्टि होती है। इसी तरह खोया को जांचने के लिए पानी में उबालकर ठंडा करें फिर आयोडीन डाले। अगर रंग नीला हो जाए तो मिलावट की पुष्टि होती है। यह ऐसी प्रक्रिया है जिससे घर में ही मिलावट को पकड़ा जा सकता हे।
