संवाद सूत्र, असोथर : यमुना कटरी की स्वास्थ्य आकांक्षाओं पर असोथर पीएचसी खरी नहीं उतर पा रही है। यहां बच्चों और महिलाओं के विशेष उपचार की कोई सुविधा नहीं है। प्रसव वाली महिलाओं का उपचार कम रेफर ज्यादा किया जाता है। कई बार तो उपचार में देरी के कारण प्रसूताएं दम तोड़ देतीं हैं। जुकाम, बुखार जैसे सामान्य रोगों के लिए अस्पताल की ओपीडी चलती है और मरीज भी भर्ती होते हैं लेकिन जरा सी तबीयत बिगड़ने पर रेफर ही एक मात्र उपाय है। क्योंकि, यहां विशेषज्ञ चिकित्सक हैं ही नहीं। तिरहार क्षेत्र की 44 ग्राम पंचायतों की स्वास्थ्य सेवाएं इसी पीएचसी के भरोसे हैं। यहां सुबह से शाम तक में प्रतिदिन 70 से 90 मरीज पहुंचते हैं। सामान्य रोग होने की दशा में उन्हें उपचार मिल जाता है, लेकिन तबियत ज्यादा खराब हुई तो यह मरीज पास में खुले नर्सिंग होम में जाते हैं या फिर उन्हें जिला मुख्यालय भेजा जाता है। खास बात यह है कि यहां सामान्य रोगियों को भर्ती करने के लिए मात्र दो ही बेड हैं, जिसके कारण अधिकांश मरीजों को दवा देकर घर ही लौटा दिया जाता है। अच्छी बात यह है कि यहां दो चिकित्सकों ने काम का बंटवारा रात-दिन के हिसाब से कर रखा है, जिससे डाक्टर के अभाव में लौटना नहीं पड़ता है। अगर चिकित्सक अपने आवास पर भी होते हैं तो फोन की सूचना पर पहुंच कर मरीज को देखते हैं। रोना इस बात का है कि महिला, बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। आपरेशन सुविधा कभी शुरू ही नहीं हुई, क्योंकि किसी सर्जन की यहां तैनाती आज तक नहीं हुई है। पीने के पानी का संकट, टंकी खराब

यहां की पानी टंकी वर्षों पहले खराब हो चुकी है, जो आज तक बन नहीं सकी। रही बात पेयजल सुविधा की तो यहां एक हैंडपंप परिसर में लगा है जो पानी कम मिट्टी अधिक देता है और उसका पानी बदबू करता है। इससे यहां आने जाने वाले क्या स्टाफ भी इस पानी का प्रयोग नहीं करते हैं। लोग पानी की जरूरत पर बाहर लगे हैंडपंप से पानी लाते हैं जो काफी दूर है। ओटी का नहीं खुला ताला

पीएचसी में आपरेशन थियेटर तो बना है, लेकिन ताला आज तक नहीं खुला। क्योंकि यहां पर सर्जन की तैनाती नहीं है। अस्पताल में सुविधा न होने के चलते छोटे-छोटे आपरेशन झोलाछाप कर देते हैं, कई बार लोगों की हालत भी बिगड़ी और उन्हें जान से भी जाना पड़ा लेकिन सुविधा न होने के कारण लोग झोलाछाप के पास फंस जाते हैं। अस्पताल के स्टाफ की स्थिति

यहां पर पांच डाक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र दो डाक्टर तैनात है। डा. उपेंद्र कुमार, डा. शिव सिंह के अलावा फार्मासिस्ट दिनेश, व दो स्टाफ नर्स के अलावा चौकीदार व वार्ड ब्वाय सेवाएं देते हैं। स्टाफ में डाक्टरों के अलावा सभी पदों पर कर्मचारी है। लेकिन अधिकांश कर्मचारी मनमानी के चलते प्रतिदिन नहीं आते हैं। अस्पताल की कहानी ग्रामीणों की जुबानी

अस्पताल बना तो हैं लेकिन बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाती है जिसके कारण मरीज लेकर जिला मुख्यालय या फिर नर्सिंग होम में जाना पड़ता है।

अनुज सविता, हरनवां अस्पताल में दवाएं बाहर से लिखी जाती है। दवाएं भी वही लिखी जाती है जिनमें डाक्टर के लिए भारी कमीशन होता है। जबकि उसी मर्ज की दवाएं अस्पताल में मुफ्त हैं।

भोले मौर्य, मुराइन डेरा कटरी क्षेत्र में यह एक मात्र अस्पताल है। यहां भारी संख्या में लोग आते हैं। सिर्फ इस अस्पताल को ही बेहतर बना दिया जाए तो कटरी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं सुधर जाएंगी।

कल्लू, असोथर इमरजेंसी व ओपीडी उपचार तो मिलता है, लेकिन विशेषज्ञ उपचार न मिलना इस अस्पताल की बड़ी समस्या है। इसमें सुधार के लिए जन प्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए।

पुतानी, असोथर असोथर पीएचसी में अभी तक शिकायतें नहीं थीं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से शिकायतों का अंबार है। जांच कराई जाएगी और जो कमियां है उन्हें दुरस्त कराकर दूर किया जाएगा बेहतर सेवाएं दी जाएगी।

डा. गोपाल माहेश्वरी

Edited By: Jagran