जागरण संवाददाता, फतेहपुर : शहर के जिला पूर्ति कार्यालय के पास रहने वाले बेसिक शिक्षा के व्यायाम शिक्षक आदित्य पाण्डेय गुमनाम ¨जदगी जीकर मरीजों के लिए 25 साल से मसीहा बनने का काम करते आ रहे हैं। 21 साल की उम्र में रक्तदान-महादान से मिली प्रेरणा के चलते वह अब तक 11वीं बार रक्तहीनता के शिकार मरीजों के लिए मददगार बन चुके हैं।

बुधवार को सरकारी काम से बीएसए दफ्तर आए शिक्षक को जिला अस्पताल से फोन आया कि एक यूनिट ब्लड की जरूरत है। यदि आप तैयार हैं तो जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे मरीज को आकर बचा लीजिए। मोबाइल पर आई सूचना से उनके कदम जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की ओर चल पड़े। अस्पताल पहुंच कर उन्होंने एक यूनिट ब्लड दान किया।

जिला अस्पताल से ब्लड डोनेट का सार्टिफिकेट लेकर निकले शिक्षक ने बताया कि उन्होंने अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर अस्पतालों में दर्ज करा रखा है। सरहदों में आए दिन होने वाली गोलाबारी से जख्मी जवानों के लिए भी वह रक्तदान करते हैं। मिलेट्री और सिविल अस्पतालों से ब्लड डोनेट के 11 वां सार्टिफिकेट उनके पास सुरक्षित है। 21 साल की उम्र से रक्तदान का सिलसिला अभी भी चल रहा है। श्री पाण्डेय बताते हैं कि इसके लिए वह डॉक्टर की सलाह लेना नहीं भूलते हैं। अब तक ली गई सलाह से उन्हें पता चल गया है कि उनका शरीर कब रक्तदान के लिए तैयार रहता है। सूचना मिलते ही वह तत्काल चल पड़ते हैं और रक्तदान से उन्हें बहुत बड़ा संतोष मिलता है। बीएसए शिवेंद्र प्रताप ¨सह ने कहाकि ऐसे शिक्षक पर उन्हें ही नहीं विभाग को गौरव की अनुभूति हो रही है।

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