14 साल पहले भी हुई थी कार्रवाई

- पिता के जीवित रहते जालसाजी कर हासिल की थी नौकरी

- हाई कोर्ट के आदेश पर फिर हुई जांच के बाद की गई कार्रवाई

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जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : जीवित पिता को मृत बताकर पुलिस महकमे में नौकरी पाने वाले दो सहायक उपनिरीक्षक लिपिक (एएसआइ) को 14 साल बाद दोबारा बर्खास्त कर दिया गया है। इससे पहले जांच में दोषी मिलने पर दोनों को वर्ष 2007 में भी बर्खास्त किया जा चुका है। हालांकि, तब दोनों के हाई कोर्ट जाने पर उन्हें निलंबित रख दोबारा जांच के आदेश दिए गए थे। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर फिर कार्रवाई की गई है।

मैनपुरी जिले के भोगांव निवासी राजीव सिंह ने अपने पिता आशाराम राजपूत के पुलिस विभाग में सेवारत रहने के दौरान ही उन्हें मृत दर्शाकर मृतक आश्रित कोटे से वर्ष 1995 में जनपद इटावा से सहायक उप निरीक्षक लिपिक की नौकरी हासिल की थी। इसी तरह मैनपुरी के ही करहल निवासी मुनेंद्र कुमार ने भी अपने पिता रामनाथ की जगह जालसाजी कर वर्ष 2000 में नौकरी पाई थी। शिकायत पर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी बबिता साहू ने जांच में दोनों के पिता के जीवित होने की पुष्टि की थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन पुलिस उप महानिरीक्षक ने वर्ष 2007 में दोनों को बर्खास्त कर दिया था। इस पर दोनों ने हाई कोर्ट में गुहार लगाई थी। हाई कोर्ट ने तीन जनवरी 2020 को दोनों निलंबित रखते हुए दोबारा जांच कराने के आदेश दिए थे। इस पर मामले की जांच पांच मार्च 2021 को एएसपी को दी गई थी। एएसपी अजय प्रताप ने सात सितंबर को जांच रिपोर्ट में निलंबित सहायक उप निरीक्षक लिपिक राजीव सिंह और मुनेंद्र कुमार को दोषी करार दिया। इसके बाद दोनों को 23 अक्टूबर को बर्खास्त कर दिया गया। एसपी अशोक कुमार मीणा ने बताया कि मामला काफी पुराना है। हाई कोर्ट के आदेश पर दोबारा जांच में दोनों के दोषी मिलने पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है।

Edited By: Jagran