जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : रोडवेज बसों को थके हुए चालक दौड़ा रहे हैं। यही कारण है कि वह अपनी जान तो संकट में डाल ही रहे हैं, साथ ही यात्रियों को भी हादसे के मुंह में धकेल रहे हैं। जबकि गत वर्ष आगरा के पास हुए हादसे के बाद राज्य सड़क परिवहन निगम मुख्यालय ने 300 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली बसों में दो चालकों की ड्यूटी लगाने का आदेश दिया था, लेकिन यह आदेश निगम के डिपो की फाइल में ही कैद होकर रह गया। सोमवार सुबह दुर्घटनाग्रस्त हुई कौशाम्बी डिपो की बस में भी एक ही चालक की ड्यूटी थी। वह भी रात भर का जागा हुआ था और सुबह घर पहुंचने की जल्दी में था।

रोडवेज मुख्यालय ने गत वर्ष 300 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली सभी बसों में डबल चालकों की तैनाती करने का आदेश दिया था, लेकिन फर्रुखाबाद सहित अधिकांश डिपो में इस आदेश का पालन नहीं हो रहा है। कौशाम्बी डिपो की दुर्घटनाग्रस्त बस को भी चालक पवन कुमार तड़के यहां लेकर बस स्टेशन पर आया। वह रात भर का जागा हुआ था और बस स्टेशन के सामने एक होटल में चाय पीकर 15 मिनट में ही बस लेकर चला गया। घायल सवारियों ने बताया कि बस की रफ्तार तेज थी। हकीकत यह है कि सुबह कौशाम्बी, अलीगढ़, एटा आदि डिपो की बसें दिल्ली से तड़के यहां आती हैं, और तुरंत यहां से वापस जाती हैं। फर्रुखाबाद डिपो की करीब 25 बसें प्रतिदिन दिल्ली मार्ग पर संचालित होती है। सभी बसों में एक ही चालक की तैनाती होती है। जबकि फर्रुखाबाद से कौशांबी व आनंद बिहार बस स्टेशन की दूरी 316 किलोमीटर है।

यह हैं नियम

- रोडवेज बसों में चालक को आठ घंटा ड्यूटी करने का नियम है। - विश्राम करने करने को 100 किलोमीटर पर लेना चाहिए स्टापेज। - 300 किलोमीटर चलने वाली बस में दो चालकों की हो तैनाती। - चालक-परिचालक को वर्दी में होना जरूरी है।

संविदा चालकों को होता है नुकसान

रोडवेज के पास अधिकांश संविदा चालक है। उन्हें किलोमीटर के हिसाब से वेतन मिलता है। एक रूट पर दो चालकों की तैनाती होने पर उन्हें आर्थिक नुकसान होता है। दोनों चालकों को ड्यूटी करनी पड़ती है, लेकिन किलोमीटर आधे-आधे जोड़े जाते हैं। इससे वह अकेले ही बस ले जाते हैं। सात किमी दायरे में इस माह हुए तीन हादसे

कायमगंज मार्ग पर सात किलोमीटर की दूरी पर सात दिन में दो रोडवेज बसें दुर्घटना हो गईं। पहली घटना 17 सितंबर की देर शाम हुई। जिससे करीब चालीस लोग घायल हुए थे। दूसरी घटना सोमवार को हो गई। इससे पहले 07 सितंबर को बेकाबू रोडवेज बस ने बाइक सवार दंपती को कुचल दिया था। एटा में बदलते हैं हमारे अधिकांश चालक

डबल चालक की तैनाती में समस्या तो है, लेकिन दिल्ली जाने वाली बसों में अधिकांश चालक एटा जनपद के निवासी लगाए हैं। वह दिल्ली से वापस लौटने वाली बसों में एटा से ही ड्यूटी पर आ जाते हैं। जिससे दिल्ली से बस चलाकर लाने वाले चालक को आराम मिल जाता है।

गौरीशंकर, बस संचालन प्रभारी, फर्रुखाबाद डिपो

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