संवाद सहयोगी, अमृतपुर : बलीपट्टी रानीगांव में ग्राम्य विकास विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर सोतानाला के किनारे दो वर्ष पूर्व पौधारोपण कराया था। जिले के नोडल अधिकारी प्रमुख सचिव ने भी पंचवटी में पौधारोपण किया था, लेकिन दो वर्ष बाद पौधारोपण की भूमि बेसहारा मवेशियों की शरणस्थली बन गई है और पौधे सूखकर गायब हो गए हैं।

अमृतपुर तहसील मुख्यालय के निकट सोतानाला के किनारे की भूमि पर वर्ष 2019 में ग्राम्य विकास विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर पौधारोपण कराया। जिले के नोडल अधिकारी व प्रमुख सचिव ने पीपल, तत्कालीन डीएम मोनिका रानी ने बरगद, तत्कालीन सीडीओ डा. राजेंद्र पैंसिया ने आंवला, डीएफओ पीके उपाध्याय ने बेल व एसडीएम ने अशोक का पौधा लगाया था। 50 एअर भूमि पर पौधे लगाकर पंचवटी बनाई गई। आम व जामुन के पौधे रोपित किए गए। सोतानाला के किनारे बांस के पौधा लगाए गए। तब डीएम ने कहा था कि सोतानाला के किनारे बांस के पौधे लगने से कटान रुकेगा। जिले के नोडल अधिकारी ने पौधों की देखरेख करने के निर्देश दिए थे। ग्राम पंचायत ने पंचवटी तक जाने के लिए खड़ंजा लगाकर मार्ग बनाया गया और पौधों को बेसहारा मवेशियों से बचाने के लिए चारों तरफ बल्ली के सहारे कंटीले तार लगाए गए। पंचवटी के पौध में ट्री गार्ड भी लगाए गए। हालांकि देखरेख के अभाव में ट्री गार्ड व तार गायब हो गए। पौध सूख गई या मवेशी चर गए। अब पौधरोपण की भूमि बेसहारा मवेशियों की शरणस्थली बनकर रह गई है। पंचवटी तक जाने के लिए लगाया गया खड़ंजा भी गायब हो गया है। खंड विकास अधिकारी राजेपुर गगन दीप ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मृत पौधों के स्थान पर इस वर्ष दूसरे पौधे लगाए जाएंगे।

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