जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : फर्रुखाबाद सहित कई जनपदों में क्रय केंद्रों पर आ रहे काले-भूरे धान के संबंध में प्राप्त हो रही शिकायतों के बाद अब प्रदेश शासन ने बारिश में भीगने से काले पड़े धान की खरीद का मामला केंद्र सरकार को संदर्भित कर दिया है। विगत माह हुई अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण काफी किसानों का धान काला या भूरा पड़ गया है। यही कारण है कि जनपद में धान खरीद गति नहीं पकड़ पा रही है। विगत एक नवंबर से शुरू हुई धान खरीद में 18400 के सापेक्ष अभी तक मात्र 542.58 मीट्रिक टन (2.95 प्रतिशत) ही धान खरीद हो सकी है।

जनपद में धान खरीद के कुल स्थित 19 केंद्रों में से पांच पर तो अभी तक बोहनी नहीं हुई है। खाद्य विपणन शाखा को मिले 10500 एमटी के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक मात्र 349.22 एमटी (3.33 प्रतिशत) ही खरीद हुई है। जबकि मंडी परिषद व खाद्य निगम जैसी संस्थाओं की स्थिति और भी खराब है। हालांकि पीसीएफ ने 5400 एमटी के लक्ष्य के सापेक्ष 190.96 मीट्रिक टन धान खरीदा है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी वीके सिंह ने बताया कि बारिश में भीग कर काला या भूरे रंग के धान की खरीद के संबंध में पूरे प्रदेश से शिकायतें आ रही थीं। इसी के चलते प्रदेश शासन की ओर से मामले को केंद्र सरकार को संदर्भित कर दिया गया है। मोहम्मदाबाद में मंडी परिसर में खाद्य एवं रसद विभाग के क्रय केंद्र पर अधिकांश किसानों के सैंपल बरसात से भीगने से धान का रंग काला पड़ जाने से फेल हो रहे हैं। विद्युत आपूर्ति कम होने से धान की छटाई भी नहीं हो पा रही है। जिससे किसानों को इंतजार करना पड़ता है। क्रय केंद्र पर किसानों को 15 दिन का टोकन दिया जा रहा है। क्रय केंद्र प्रभारी अजय गौतम ने बताया कि बिजली न आने से छटाई नहीं हो पा रही है। कई ट्राली धान दो दिन से तुलाई के लिए रखा है। अधिकांश किसानों का धान खराब होने से सैंपल भी फेल रहे हैं। नीबकरोरी क्रय केंद्र पर अभी तक कांटा नहीं लगा है। किसानों की भीड़ क्रय केंद्र पर न हो, इसलिए 15 दिन का टोकन दिया जा रहा है। किसानों ने बताया कि धान का भुगतान चौथे दिन हो रहा है। कमालगंज के सहकारी क्रय विक्रय समिति धान खरीद केंद्र पर अब तक महज 12 किसानों से 705 क्विंटल की खरीद हो सकी है। बरसात के कारण बिगड़ी धान की गुणवत्ता खरीद में रोड़ा बनी हुई है। केंद्र प्रभारी अमरपाल सिंह ने बताया बरसात के कारण धान की गुणवत्ता खराब हो गई है। जिससे खरीद कम हो पा रही है वही। आधार लिक होने वाले बैंक खाते में ही भुगतान भेजने की बाध्यता भी समस्या बनी हुई है। कई किसानों के सैंपल आए हुए हैं जिनकी जांच के बाद धान खरीदा जाएगा।

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