जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद :

प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और कार्यो को गति देने के मकसद के साथ सरकारी दफ्तरों में 15 अगस्त से ई-आफिस लागू करने के दावे फुस्स हो गए। स्वतंत्रता दिवस बीत गया, मगर दफ्तर अब भी 'बाबू राज' के ही गुलाम हैं। ई-आफिस के लिए कई चक्रों में अधिकारियों व कर्मचारियों के प्रशिक्षण के बाद भी दफ्तरों में अब भी फाइलों का लटकना और सरकना जारी है। ई-आफिस के लिए उपकरण अभी उपलब्ध नहीं हो सके हैं।

प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक कार्यो में जवाबदेही तय करने के लिए ई-आफिस प्रणाली को जिला स्तर तक विस्तारित करने का निर्णय लिया था। इसकी तैयारी तीन माह से चल रही थी, प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ई-आफिस में कंप्यूटर पर फाइल तैयार होगी। अधिकारी का अपना डिजिटल हस्ताक्षर होगा, जिससे फाइल खोली या आगे प्रेषित की जाएगी। फाइल जिसके पास लंबित होगी, कंप्यूटर पर उसके नाम के आगे लाल निशान दिखेगा। डिजिटल हस्ताक्षर से खोल कर फाइल आगे भेज दी जाएगी तो हरा निशान हो जाएगा। इससे पता चल जाएगा कि कौन से फाइल किस स्तर पर कब से लंबित है।

---

यह कहते हैं जिम्मेदार

'जिला स्तरीय अधिकारी अपने विभागाध्यक्षों को कंप्यूटर व अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिख चुके हैं, लेकिन उपकरण विभागों को उपलब्ध नहीं हुए हैं। जिला स्तर पर तैयारिया लगभग पूर्ण कर ली गई हैं। अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर भी बन गए हैं।

-सुरेश चंद्र शाक्य, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी'

Posted By: Jagran