जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : प्रधानमंत्री ने 2025 तक भारत को टीबी से मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इसी के मद्देनजर प्रत्येक तीन माह में टीबी मरीजों की खोज की जा रही है। इन मरीजों की जब एचआइवी की जांच कराई गई तो छह मरीज एचआइवी पॉजिटिव के सामने आए हैं। हालांकि इन लोगों का इलाज शुरू करा दिया गया है।

जिले में हर तीन माह में अभियान चलाकर टीबी मरीजों की खोज की जाती है। ताकि नए मरीजों का इलाज कर उनकी जान बचाने के साथ-साथ अन्य लोगों को इन संक्रमण से बचाया जा सके। जनवरी से अब तक चलाए गए अभियान में 3800 नए मरीज सामने आए हैं। इन लोगों की जब एचआइवी की जांच कराई गई तो इनमें छह रोगी एचआइवी पॉजिटिव के पाए गए। इन लोगों का इलाज शुरू करा दिया गया है। गोद लेने को संस्थाओं से किया जा रहा संपर्क

18 वर्ष से कम उम्र के लोगों का टीबी का इलाज न हो पाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग कुछ संस्थाओं से संपर्क कर रहा है। ताकि वह लोग इन बच्चों को गोद लेकर उनका इलाज करा सकें। हालांकि अभी तक पुलिस अधिकारी चार लोगों को गोद ले चुके हैं। क्षय रोगियों के इलाज के प्रति राज्यपाल भी गंभीर हैं। एक अप्रैल 2018 से अब तक जिले में सात हजार टीबी रोगी हैं। उन्होंने बताया कि विगत दो वर्षों से एचआइवी, शुगर, थाइराइड की जांच अनिवार्य कर दी गई है। इसके बाद से उक्त जांचें कराई जाती हैं। अब तक छह रोगी एचआइवी पॉजिटिव के सामने आए हैं।

- डॉ. सुनील मल्होत्रा, जिला क्षय रोग अधिकारी।

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