कमालगंज, संवाद सूत्र : भोजपुर चिल्लागाह में साहिबे सज्जादा को गुस्ले मुबारक देकर मुकम्मल कफन पहनाया गया। कुल शरीफ के बाद महफिले समां में ढफ बजाकर पढ़ी गई ख्वाजा कुतुबद्दीन बखत्यार काकी की रुबाई सुनते ही बेहोशी के आगोश में समाए सज्जादानशीन का कफन उतारकर दुआए खैर की गई। 'हजरते गालिब का दामन थाम ले, जिनको अहमद का घराना चाहिए' कलाम ने खूब वाहवाही लूटी। हजरत शेख मखदूम के 697 वें उर्स में शुक्रवार को भोजपुर चिल्लागाह पर बाद नमाज जोहर महफिले समां की शुरुआत तिलावते कुरान-ए-पाक से की गई। हजरत शेख मखदूम की करामात और फैजान पर रोशनी डालते हुए मौलाना एहसानुल हक, मौलानाअब्दुल मुबीन नूरी, हाफिज जीशान, हाफिज कारी कामरान, इमरान शैदा, अब्दुल माजिद, हाफिज मुईद ने अपने अपने उम्दा कलाम पेश किए। मो. लतीफ कमालगंजवी ने 697 साल पुरानी ढफ बजाकर रुबाई पढ़ी। उसके रुहानी मकसद को समझते ही सज्जादानशीन अजीजुल हक गालिब मियां पर बेहोशी तारी हो गई। जल्दी-जल्दी आपके जिस्म से कफन उतारा गया। कुछ देर बाद ही सज्जादानशीन को होश आ गया। उन्होंने अमन ओ अमान और खुशहाली के लिए दुआए खैर की। अकीदतमंदों को बजू के पानी एवं खुश्क रोटियों का तबर्रुक तकसीम किया गया। इस दौरान भोजपुर चिल्लागाह पर अकीदतमंदों की भीड़ कोविड के चलते कम रही। मोहसिन शमशी, भुवन बरतरिया, हस्सान, डा. इंतजार, खालिद, मो. अयूब, शानू आदि ने व्यवस्था देखी। हजरत शेख मखदूम के उर्स मुबारक व मेले में ले चल पीर की सदाओं के बीच शनिवार को शेखजी का डोला भोजपुर से शेखपुर दरगाह पर सादगी पूर्ण तरीके से आएगा।

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