यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'फर्रुखाबाद से मेरे रिश्तों के कितने इम्तहान...', फिर छलका सलमान खुर्शीद का दर्द; बयानों के निकाले जा रहे हैं कई मायने
माना जा रहा है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत फर्रुखाबाद सीट सपा के खाते में जाने से सलमाव खुर्शीद नाराज ...और पढ़ें

HighLights
- सपा से गठबंधन वाले दिन ही कहा था कि फर्रुखाबाद मेरा घर, यहां नहीं तो कहीं नहीं
- फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र से सलमान खुर्शीद के पिता भी रह चुके हैं सांसद
विजय प्रताप सिंह, फर्रुखाबाद। दो पीढ़ियों से कर्मस्थली रही फर्रुखाबाद से इस बार चुनाव मैदान से बाहर होने का मलाल पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद को है।
दो दिन पहले अपनी कर्मस्थली के दौरान भी उनका दर्द छलका था अब दिल की टीस इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा कि फर्रुखाबाद से मेरे रिश्तों के कितने इम्तिहान का सामना करना पड़ेगा। उनके इस वक्तव्य के कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं।
माना जा रहा है कि पार्टी के इस फैसले से वह दुखी हैं, इसके सियासी माहौल में कई चर्चाएं तैरने लगीं। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के पिता खुर्शीद आलम फर्रुखाबाद से 1984 में सांसद बने। उनकी विरासत को सलमान खुर्शीद ने संभाला। वह 1991 में सांसद चुने गए, जबकि पूरे देश में राम मंदिर आंदोलन तेज हो रहा था। उसके बाद वह लगातार यहां पर सक्रिय रहे।
चार लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने फर्रुखाबाद का साथ नहीं छोड़ा। 2009 में दोबारा फिर वह सांसद बने और विदेश मंत्री समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
गांधी परिवार के नजदीक रहने वाले सलमान खुर्शीद के सामने अब तक कोई पार्टी से टिकट की भी दावेदारी नहीं करता था, लेकिन इस बार सपा के साथ हुए पार्टी के समझौते में यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में चली गई। यहां से सपा ने अपना प्रत्याशी डा. नवल किशोर शाक्य को घोषित कर दिया।
सलमान खुर्शीद काफी दुखी
फर्रुखाबाद से चुनाव न लड़ पाने से वह दुखी हैं। 21 फरवरी को जब सपा के साथ गठबंधन का फैसला हुआ, उसी दिन सलमान खुर्शीद ने साफ कर दिया था कि फर्रुखाबाद मेरा घर है, यदि यहां से चुनाव नहीं लड़ेंगे तो फिर कहीं से नहीं।
उसके दो दिन बीते ही थे कि शुक्रवार को सलमान खुर्शीद ने अपने एक्स एकाउंट पर ‘फर्रुखाबाद से मेरे रिश्तों के कितने इम्तहान का सामना करना पड़ेगा। सवाल मेरा नहीं पर हमारे सबके मुस्तकबिल का है, आने वाली नस्लों का है। किस्मत के फैसलों के सामने कभी झुका नहीं। टूट सकता हूं, झुकूंगा नहीं। तुम साथ देने का वादा करो, मै नग्में सुनाता रहूं’ लिखकर राजनीतिक गलियारों को नई हवा दे दी है।
अब कुछ लोगों का मानना है कि सलमान खुर्शीद फर्रुखाबाद से निर्दलीय चुनाव मैदान में भी उतर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो गठबंधन पर असर पड़ना तय है।
