जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : खिलाड़ी के जीवन में गुरु का विशेष महत्व रहता है। गुरु के सिखाए हुए हुनर से ही खेल जगत में खिलाड़ी रोज नई-नई ऊंचाइयों को छूते हैं। गुरु अपने शिष्य को इस तरह निखारता है कि खेल के हर क्षेत्र में वह बेहतर प्रदर्शन कर सके। जिले में भी कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्होंने अपने कोच के सानिध्य में रहकर अपनी प्रतिभा को निखारने का काम किया और आगे बढ़ रहे हैं। कोच भी अपने शिष्यों को आगे बढ़ता देख खुश हैं। गुरु की प्रेरणा से बढ़ रहीं आगे

फतेहगढ़ के मोहल्ला जाफरी निवासी सच्चिदानंद की पुत्री प्रिया कुमारी और उनकी चचेरी बहन अंजली पुत्र सतेंद्र कुमार प्रदेश स्तरीय व ऑल इंडिया हॉकी प्रतियोगिताएं खेल चुकी हैं। प्रिया और अंजली अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच अनवर मोहम्मद को देते हुए कहती हैं कि स्व. ब्रह्मदत्त द्विवेदी स्टेडियम में एक साथ हॉकी की कोचिग लेना शुरू की। कोच अनवर मोहम्मद ने उन्हें बेहतर तरीके से सिखाया, जिससे उनका चयन स्टेट व नेशनल स्तर हॉकी टीम में हुआ। कोच अनवर मोहम्मद कहते हैं कि हम तो सिर्फ जरिया बनते हैं। खिलाड़ी की मेहनत ही उन्हें ऊपर पहुंचाती है। राष्ट्रीय स्तर कराटे प्रतियोगिता जीतना सपना

शिवनगर मोहल्ला निवासी रेलवेकर्मी वीरेंद्र कुदेसिया के पुत्र निशांत कुदेसिया भले ही प्रदेश स्तर की कराटे प्रतियोगिता के तीसरे राउंड में बाहर हो गए, लेकिन उनका हौसला नहीं डिगा है। वह कहते हैं कोच पारस भारद्वाज के सानिध्य में रहकर ही प्रदेश स्तर कराटे प्रतियोगिता तक पहुंचे। अगली बार जीत भी हासिल करेंगे। निशांत कहते हैं कि चार साल पहले उन्होंने कोचिग लेना शुरू की और दो साल पहले जिला स्तर कराटे प्रतियोगिता में ब्लू बेल्ट हासिल की। बगैर गुरु के खेल में निखार पाना संभव नहीं है। कराटे कोच पारस भारद्वाज कहते हैं कि करीब 40 खिलाड़ियों को वह कराटे का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इनमें बेटियां भी शामिल हैं। जब उनके सिखाए हुए बच्चे मेडल जीतते हैं तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है।

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