संवाद सूत्र, नवाबगंज : गांव में विकास की राह देख रहे नगला मगार के ग्रामीण चकरोड से गुजरने पर विवश हो रहे हैं। चुनाव में वादे कर जीतने के बाद नेताओ के मुंह मोड़ लेने से लोगों में मायूसी है।

ग्राम पंचायत कुरार के मजरा नगला मगार के लोग आजादी के बाद से विकास की राह देख रहे है। गांव की आबादी लगभग डेढ़ हजार है। जिसमें लगभग छह सौ मतदाता हैं। मतदान करने ग्रामीणों को करीब एक किलोमीटर दूर ग्राम कुरार मतदान केंद्र में जाना पड़ता है। गांव में जाने के लिए लगभग एक किलोमीटर कच्चे मिट्टी के बने चकरोड की ही व्यवस्था है। कच्चे चकरोड में जगह-जगह इतने गड्ढे है कि उससे पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है। हल्की बरसात से चकरोड पर फिसलन होने से आवागमन में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। पूरे गांव में विकास कार्यों में मात्र एक सीसी रोड का ही निर्माण किया गया है। गांव की अन्य गलियां कच्ची होने के कारण जलभराव व कीचड़ की समस्या रहती है। हल्की बरसात होने से गांव का आवागमन पूरी तरह बाधित रहता है। गांव आने वाले मुख्य मार्ग का निर्माण कराने व मार्ग को किसी मुख्य मार्ग से जोड़ने की मांग कर ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान, खंड विकास अधिकारी, जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री तक से शिकायत की, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिल सके। ग्रामीणों की माने तो चुनाव में जनप्रतिनिधि वादे करते है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की कोई सुध नहीं ले रहा है। ग्रामीण इस बार के चुनाव में कार्य कराने वाले को ही मतदान करेंगे। आजादी के बाद से आज तक गांव आने का कोई पक्का मार्ग नहीं बन सका है। जिससे लोगों को आवागमन में कठिनाई होती है। बरसात में किसी के बीमार होने पर उसे चारपाई पर रखकर ले जाना पड़ता है।

- छेदालाल। प्रधानी, जिला पंचायत, विधानसभा व लोकसभा चुनाव में नेता वोट मांगने आते हैं। उनके द्वारा पक्की सड़क बनवाने का वादा भी किया जाता है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई भी गांव में झांकने तक नहीं आता।

- उपेंद्र कुमार। चुनाव में हर बार जनप्रतिनिधियों द्वारा झूठे वादे कर हम लोगों को ठगा जा रहा है। इस बार चुनाव में पूरे गांव के लोग कार्य कराने वाले व समस्याओं का हल करने वाले को ही मतदान करेंगे।

- विवेक कुमार। गांव की सड़क बनवाने के लिए प्रधान, बीडीओ, डीएम, मुख्यमंत्री तक से शिकायतें की गईं। शिकायतों की जांच में अधिकारी गांव तक आए। जल्द कार्य कराने का भरोसा भी दिया, लेकिन कार्य शुरू नहीं हो सका।

- राजेंद्र पाल।

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