जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : इस वक्त पूरे जिले में बुखार का प्रकोप बढ़ रहा है। आम तौर पर लोग बुखार आने पर बिना जांच के ही मेडिकल स्टोर से दवा खा लेते हैं। ऐसे मरीजों को बुखार से तो राहत मिल जाती है, लेकिन धीरे-धीरे वह टाइफाइड के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में यदि आपको बुखार आए तो तत्काल चिकित्सक से सलाह लेकर अपनी जांच कराकर इलाज कराएं। जिले में टाइफाइड के मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। लोहिया अस्पताल में होने वाली जांच में एक महीने में 223 मरीज टाइफाइड के पाए गए। इसमें मलेरिया के 27 मरीज तो डेंगू के 28 रोगी मिले हैं।

डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के फिजीशियन डा. अशोक कुमार ने बताया कि इन दिनों वायरल फीवर चल रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन 1200 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें दो से तीन सौ मरीज बुखार के होते हैं। वह ज्यादातर मरीजों की जांच करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दूषित पानी और खाना खाने के जरिए बैक्टीरिया शरीर के अंदर चला जाता है। इसलिए लोगों में टाइफाइड निकल रहा है। उन्होंने बताया कि साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। स्वच्छ जगह पर खाना खाएं। बुखार आने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें। तभी बीमारी से राहत मिल सकती है।

ऐसे होता है टाइफाइड

दूषित पानी और बासा खाना से टाइफाइड होता है। इसका बैक्टीरिया दूषित पानी व खाने के जरिये शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है। इससे आतों में इंफेक्शन हो जाता है। लंबे समय तक बुखार रहने पर आतों में छेद भी हो सकता है। दिमाग भी बैक्टीरिया चला जाता है। टाइफाइड के लक्षण

- कमजोरी आना।

- भूख न लगना।

- सिर दर्द रहना।

- सर्दी के साथ बुखार आना।

- दस्त होना। यह बरतें सावधानी

- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।

- गुनगुना पानी का सेवन करें।

- खाना खाने से पहले साबुन से हाथ धोएं।

- कटे फटे फलों का सेवन न करें। बुखार से तीन दिन में राजेपुर सरायमेदा के पांच लोगों की मौत

संवाद सूत्र, कमालगंज : राजेपुर सरायमेदा मे बुखार का कहर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। मंगलवार रात बुखार के चलते दो लोगों की मौत से ग्रामीण भयभीत नजर आ रहे है। तीन दिन में यहां पांच लोगों की मौत हो चुकी है और करीब आधा सैकड़ा लोग बाहर अस्पतालों में भर्ती हैं।

राजेपुर सरायमेदा गांव में मंगलवार रात 70 वर्षीय मिज्जन खां तथा 39 वर्षीय अफरोज बेगम की बुखार के चलते मौत हो गई। गांव में हर घर में एक या दो लोग बुखार से पीड़ित हैं। प्रशासनिक उदासीनता के चलते लोग बाहर के अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं। ज्ञात हो कि तीन दिन पूर्व गांव में 65 वर्षीय इतवारीलाल, 63 वर्षीय गिल्ली खां व 22 वर्षीय हिना की मौत बुखार से हो गई थी। बुखार से निपटने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह से निष्क्रिय दिखाई पड़ रहा है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. सोमेश अग्निहोत्री ने बताया कि मंगलवार को गांव में हुई मौतों के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। गांव में कई टीम भेजी गईं तथा लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। गांव में गुरुवार को फिर टीम भेजकर लोगों का परीक्षण कराकर दवाइयां वितरित की जाएंगी।

Edited By: Jagran