जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : बढ़पुर विकास खंड के गांव याकूतगंज में बुखार का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। गांव में शायद ही ऐसा कोई घर हो जिसमें बुखार से पीड़ित मरीज न हों। बुखार से पीड़ित एक किशोर की दो दिन पहले मौत हो गई तो लोगों ने स्वास्थ्य विभाग को स्थिति की जानकारी दी। तब वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, लेकिन दूसरे दिन मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया। करीब 300 लोग बुखार की चपेट में हैं। सीएमओ और डीपीआरओ ने गांव पहुंचकर टीम को दिशा निर्देश दिए।

इस गांव के बड़ी तादात में लोग नर्सिंग होम में भर्ती है तो कई लोग घरों में बीमार पड़े हैं। कई बार स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। दो दिन पहले गांव के ही पंकज गुप्ता के 14 वर्षीय पौत्र जतिन गुप्ता की बुखार से मौत हो गई। जिला प्रशासन ने जताई नाराजगी

सोमवार को जब जिला पंचायत सदस्य विजय यादव ने जिला प्रशासन से नाराजगी जताई तब मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना सिंह ने गांव के प्राथमिक विद्यालय में स्वास्थ्य टीम तैनात कर स्वास्थ्य शिविर लगवाया। शिविर के दूसरे दिन मंगलवार को एडीओ पंचायत सत्यनारायण व स्वास्थ्य टीम ने घर-घर जाकर लोगों को जांच के लिए विद्यालय बुलवाया। वहीं मस्जिद से भी जांच कराने के लिए एलान कराया गया। सीएमओ और डीपीआरओ अमित त्यागी, डिप्टी सीएमओ डॉ. राजीव शाक्य ने शिविर में पहुंचकर टीम को दिशा निर्देश दिए। फार्मासिस्ट शिवम कटियार ने बताया कि 170 लोगों की कोविड-19 और मलेरिया की जांच की गई। जांच में सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। उन्होंने बताया कि सभी को दवा दी गई। उधर, मृत किशोर के 15 स्वजन ने अपनी जांच कराई। मरीजों की भीड़ से हुई अव्यवस्था, हंगामा

विद्यालय में लगाए गए स्वास्थ्य कैंप में मरीजों की भीड़ उमड़ने पर अव्यवस्था हो गई, जिससे स्वास्थ्य कर्मचारियों को परेशान होना पड़ा। कुछ लोगों ने डेंगू की जांच कराने को दबाव बनाया और अभद्रता भी की। शिविर में फार्मासिस्ट शिवम कटियार, लैब टेक्नीशियन पूजा मिश्रा, संदीप कुमार, एएनएम उमा देवी, निधि, स्टाफ नर्स प्रतिभा भारती, ब्लाक को-आर्डिनेटर मेनका कटियार, बेसिक हेल्थ वर्कर अभिषेक मिश्रा की तैनाती की गई है। कागजों में चला संचारी रोग नियंत्रण अभियान

गांवों में संक्रामक रोग न फैलें, इसके लिए 01 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक संचारी रोग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जिम्मेदार विभागों ने इस अभियान को महज कागजों पर संचालित कर रखा है। यही कारण है कि गांव में गंदगी के ढेर लगे और जगह-जगह जलभराव हुआ। मच्छरों के आतंक से जूझ रहे लोग नालियों से उठ रही सड़ांध से भी परेशान हैं। गांव में तेजी से बुखार फैलने की सूचना पर जब अधिकारी मौके पर पहुंचे तो हकीकत देख हतप्रभ रह गए। जबकि इस गांव में तीन सफाई कर्मचारी तैनात हैं। ग्रामीणों के मुताबिक सफाई कर्मचारी कभी गांव आते नहीं है। डीपीआरओ ने जब सफाई कर्मियों को फटकार लगाई तब गांव में सफाई करवाई गई। उसके बाद चूना डलवाया गया।

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