संवाद सूत्र, मोहम्मदाबाद : आलू की बोवाई के समय किसान डीएपी खाद की किल्लत से परेशान हैं। समितियों पर जो खाद आ रही है, वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। किसानों को एनपीके खाद दी जा रही है। कई सहकारी समितियों पर खाद का स्टाक एक ही दिन में खत्म हो गया। प्राइवेट दुकानों पर भी खाद उपलब्ध नहीं है। जहां खाद है भी वहां ब्लेक में मिल रही है। कई समितियों पर ताले पड़े रहे। किसान खाद के लिए चक्कर लगाते रहे।

सहकारी समिति मदनपुर में पांच अक्टूबर को 650 बोरी खाद आई थी। जिसे दूसरे दिन ही बड़े किसान ले गए। समिति के चक्कर लगा रहे किसान कान्हेपुर निवासी आशुतोष, सूर्यकांत, मदनपुर निवासी राजू यादव, रघुवीर सिंह, अमर प्रताप ने बताया कि समिति पर खाद नहीं है। जिससे आलू की बोवाई में विलंब हो रहा है। प्राइवेट दुकानों पर डीएपी ब्लेक में 1300 से 1600 रुपये प्रति बोरी मिल रही है। डीएपी के साथ जिक व कैल्शियम भी जबरन दी जा रही है। खिमसेपुर सहकारी समिति पर बीघामऊ निवासी ओमकार, दाउदपुर निवासी प्रेमनरायन ने बताया कि समिति बंद है। वह लोग सुबह से खाद लेने के इंतजार में बैठे हैं। प्राइवेट दुकानदारों ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूटर महंगी खाद देने के साथ जिक, कैल्शियम व अन्य उर्वरक दे रहैं, तभी डीएपी मिलती है। मजबूरी में किसानों को डीएपी के साथ जिक व अन्य सामान देना पड़ता है। जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियां वीके अग्रवाल ने बताया कि कुछ सचिव खाद का उठान करने पीसीएफ गोदाम आए हुए थे। इसके चलते संबंधित समिति कुछ समय के लिए बंद रही हो सकती है। समितियों को समय से खोलने के निर्देश दिए गए हैं। खाद की पर्याप्त उपलब्धता जिलाधिकारी के प्रयास से सुनिश्चित की गई है। कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी। 3350 एमटी खाद के चेक भेजे गए

सहायक निबंधक ने बताया कि अभी तक पीसीएफ को 2347 एमटी एनपीके, 775 एमटी डीएपी, 103 एमटी यूरिया और 125 एमटी म्यूरेट आफ पोटाश के गुड फार पेमेंट एडवांस चेक उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके सापेक्ष समितियों को किए गए खाद का प्रेषण लगभग पचास फीसद ही है। समितियों पर खाद शीघ्रता से पहुंचने पर ही कालाबाजारी पर रोक लग सकेगी। इसका प्रयास किया जा रहा है।

-------- पीसीएफ के जिला प्रबंधक के खिलाफ एफआइआर को पत्र

जासं, फर्रुखाबाद : भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष वीके गंगवार ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कृत्रिम अभाव बनाकर खाद की कालाबाजारी को प्रोत्साहित करने के लिए पीसीएफ के जिला प्रबंधक को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के अलावा एफआइआर दर्ज कराने की मांग की है।

पत्र में कहा गया है कि फर्रुखाबाद आलू का प्रमुख उत्पादक जिला है। अक्टूबर में आलू की बोवाई को खाद की आवश्यकता होती है। पीसीएफ द्वारा समय से समितियों को खाद न भेज कर जनपद में खाद का कृत्रिम अभाव उत्पन्न किया गया। इससे किसानों में सरकार की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जनपद में कुल 75 हजार बोरी खाद पीसीएफ के बफर गोदामों में रखी थी। जिलाधिकारी के प्रयास से वितरण शुरू हुआ। इसके बावजूद अभी भी काफी खाद गोदामों में डंप है। रैक प्वाइंट से खाद का समितियों को सीधा वितरण लगभग पांच लाख रुपये से अधिक का गोलमाल किया गया है। अपर जिलाधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि इस समय पहली प्राथमिकता किसान को खाद उपलब्ध कराने की है। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार फिलहाल अभियान चलाकर उर्वरकों का बफर गोदामों से समितियों के जरिए खाद का वितरण कराया जा रहा है। पीसीएफ के जिला प्रबंधक मोहित गुप्ता की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

Edited By: Jagran