जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद: शहर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नगरपालिका की है। टंकियों में क्लोरीन डालने को डोजर खराब पड़े है। काफी दिनों से टंकियों में क्लोरीन नहीं डाली जा रही है। पालिका ने चार साल पहले क्लोरीन की खरीद की थी। अभी भी स्टोर में क्लोरीन के ड्रम धूल फांक रहे है।

नगरपालिका परिषद की 15 टंकी इन दिनों संचालित है। जिनसे नागरिकों को जलापूर्ति दी जाती है। नियमानुसार ढाई हजार किलोलीटर पानी में प्रतिदिन तीन लीटर क्लोरीन मिलाई जानी चाहिये। ताकि लोगों को शुद्ध पानी मिल सके। क्लोरीन मानक के अनुसार टंकी में डालने को नलकूपों पर डोजर लगाये जाते है। अधिकांश टंकियों के डोजर खराब पड़े है। स्वास्थ्य विभाग को क्लोरीन की मात्रा चेक करने का अधिकार है। वह भी यह जिम्मेदारी परी नहीं रहा है। नगर पालिका परिषद ने वर्ष 2015 में 100 ड्रम क्लोरीन खरीदी थी। पालिका के जलकल विभाग के स्टोर में अभी भी करीब एक दर्जन से अधिक ड्रेम धूल फांक रहे है। चार साल पुरानी क्लोरीन की गुणवत्ता मानक के अनुसार बची है अथवा नहीं। इसकी जानकारी भी जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है। स्टोर में रखे ड्रमों की दशा देखकर पता चलता है कि क्लोरीन टंकियों में डालने लायक नहीं बची। लोग मजबूरन प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है। मै अभी बाहर हूं। क्लोरीन टंकियों में हर रोज डालने का नियम है। जो डोजर खराब हैं, उनको सही कराया जायेगा। अभी हाल ही में क्लोरीन नलकूपों पर भेजी गई है।

बीबी ¨सह, जलकल अभियंता

Posted By: Jagran

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