संवाद सूत्र, नवाबगंज (फर्रुखाबाद) : रोजी-रोटी की तलाश में घर बार छोड़कर परदेश गए तो कोरोना ने उसमें भी खलल डाल दिया। जमा पूंजी खर्च कर किसी तरह दिन काटे, लेकिन वह भी खत्म हो गई तो किसी तरह घर लौटे तो उन्हें अपने ही लोगों ने गांव में घुसने से रोक दिया। कहा, पहले कोरोना की जांच फिर प्रवेश मिलेगा। इसी बात पर विवाद हुआ तो संघर्ष हो गया। पुलिस पहुंची तो उनको घर में ही क्वारंटाइन कराया। इस मामले में प्रधान समेत 17 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई।

सलेमपुर त्यौरी गांव निवासी अव्वल हसन दिल्ली में रहते थे। सोमवार को वह नोएडा से रोडवेज बस से एसकेएम कॉलेज स्थिति क्वारंटाइन सेंटर पहुंचे। वहां रुकने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनकी जांच की। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद टीम ने उन्हें राशन किट देकर होम क्वारंटाइन रहने का निर्देश देते हुए घर भेज दिया। अव्वल हसन के घर पहुंचने की जानकारी पर प्रधान प्रमोद कुमार व अन्य ग्रामीणों को हुई तो घर पहुंचकर उनका विरोध किया। जब अव्वल हसन ने कहा कि उनकी जांच की हो चुकी है तो ग्रामीणों ने कहा कि थर्मल स्क्रीनिंग में केवल बुखार की जांच होती है। पहले कोरोना की जांच कराओ, उसके बाद ही गांव में रहने दिया जाएगा। इसी बात पर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया और हाथापाई हुई। दारोगा जितेंद्र कुमार ने किसी तरह लोगों को समझाकर शांत किया और अव्वल हसन को घर में ही रहने की हिदायत दी। पुलिस ने उनके पुत्र एवन अली की तहरीर पर प्रधान प्रमोद कुमार, विनोद कुमार सहित कुल 17 अज्ञात लोगों के खिलाफ गाली गलौज, जानमाल की धमकी व लॉकडाउन के उल्लंघन सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

Posted By: Jagran

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