अयोध्या : मंडलायुक्त मनोज कुमार मिश्र से विवादित परिसर में दीपोत्सव मनाने की अनुमति मांगने गए संतों को निराश होना पड़ा। मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि वहां सुप्रीमकोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने का आदेश दे रखा है और इसमें किसी प्रकार की छेड़-छाड़ संभव नहीं है। अनुमति मांगने गए संतों के प्रतिनिधि मंडल में मणिरामदास जी की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास, संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास, रामचरितमानसभवन के महंत अर्जुनदास, पार्षद रमेशदास, विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा, भाजपा की क्षेत्रीय समिति के सदस्य वैश्य विनोद जायसवाल शामिल रहे। विहिप प्रवक्ता के अनुसार संतों ने रामलला के दरबार में 5100 दीप जलाए जाने की इजाजत के लिए मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा है और इस संबंध में दो दिन तक मंडलायुक्त के निर्णय की प्रतीक्षा के बाद संत बैठक कर समुचित निर्णय लेंगे। उल्लेखनीय है कि विहिप के इस एलान से सरगर्मी बढ़ गई थी और इसी के जवाब में बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब ने कहा था कि वे भी परिसर में नमाज पढ़ने की मांग करेंगे। मंडलायुक्त के रुख से साफ हो गया है कि इस तरह की मांग मंदिर-मस्जिद विवाद की सतह पर कोरी स्टंटबाजी थी।

Posted By: Jagran

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