फैजाबाद : प्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन के माधव भवन में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान महायज्ञ के आखिरी दिन व्यास पीठ पर विराजमान अशर्फीभवन पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य ने सैन्य अभियान के तहत प्रभु राम के लंका में प्रवेश का प्रसंग जीवंत किया। उन्होंने बताया, समुद्र पर सेतु का निर्माण कर प्रभु अपनी सेना के साथ लंका में प्रवेश करते हैं। रावण के भाई विभीषण प्रभु के सम्मुख शरणागत होते हैं। इससे पूर्व विभीषण भाई रावण को भगवान राम की शरण में जाने और सीता को ससम्मान वापस करने की सलाह देते हैं पर रावण विभीषण को डांटते हुए भगा देता है। अंतत: राम-रावण में युद्ध अपरिहार्य हो जाता है। घमासान युद्ध के बीच मेघनाद के प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। भाई को मूर्छित देख प्रभु राम विलाप करने लगते हैं। इसी बीच वैद्यराज सुषेण की सलाह पर हनुमानजी सजीवन बूटी लाकर लक्ष्मण को पुनर्जीवित करते हैं। अंतत: राम समस्त सेना सहित रावण का भी वध करते हैं। विभीषण को लंका का राजा बनाने के बाद प्रभु राम लक्ष्मण एवं मां सीता के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या आते हैं। राजगुरु वशिष्ठ ने भगवान राम का राज्याभिषेक किया।

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