अयोध्या, जेएनएन। Ayodhya Ram Barat: विश्व हिन्दू परिषद की राम बारात गुरुवार को कारसेवक पुरम से धूमधाम से निकली है। यह राम बारात नेपाल के जनकपुर जाएगी। तीन दिसंबर को राम बारात जनकपुर से अयोध्या की ओर प्रस्थान करेगी।

अयोध्या से आज रवाना होने वाली राम बारात 28 नवंबर को नेपाल के जनकपुर पहुंचेगी। अयोध्या से नेपाल तक रास्ते में भगवान राम से जुड़े स्थानों पर बारात का पड़ाव होगा। गुरुवार को बारात निकली है जो 28 नवंबर को जनकपुर पहुंचेगी।

इसके बाद एक दिसंबर को मां सीता का भगवान राम से विवाह होगा। जनकपुर में दो दिसंबर को राम कलेवा होगा। इसके बाद तीन दिसंबर को राम बारात अयोध्या के लिए प्रस्थान करेगी। विश्व हिंदू परिषद हर पांच वर्ष पर राम विवाह का आयोजन करता है। बारात अयोध्या से अंबेडकर नगर, गाजीपुर, बक्सर, आरा, हरिपुर, पटना, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, बारो पट्टी कमतौल मधुबनी, बारोपट्टी मधवापुर मटियानी होकर जलैस जनकपुर पहुंचेगी। जनकपुर में तिलक उत्सव के बाद अगले दिन मठकोर होते हुए 28 नवंबर को जनकपुर पहुंचेगी।

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला रामलला के हक में आने के बाद से विश्व हिन्दू परिषद ने पहले बड़े आयोजन को भव्यता प्रदान किया है। इस बारात में शामिल रथ को प्रस्तावित राम मंदिर के मॉडल का स्वरूप प्रदान किया गया है। राम मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया रथ बारात का प्रमुख आकर्षण है।

इस रथ में भगवान श्रीराम विग्रह के रूप में विराजमान होंगे। इसी तरह बारात में एक और रथ शामिल होगा। इस रथ पर भगवान श्रीराम के स्वरूप को विराजमान किया जाएगा। अयोध्या से निकलकर नेपाल के जनकपुर तक जाने वाली राम बारात का रास्ते में कई स्थानों पर स्वागत किया जाएगा। बारात में शामिल संत और श्रद्धालु सफर के दौरान राम मंदिर का संदेश भी गुंजायमान करेंगे।

बारात प्रस्थान की पूर्व बेला से ही बिखरा उल्लास

कारसेवकपुरम से राम बारात के आज जनकपुर के लिए प्रस्थान करने से पहले कल से ही काफी गहमा-गहमी थी। विवाह की रस्म के अनुरूप भगवान राम सहित चारों भाइयों के स्वरूप को हल्दी लगाया गया। रस्म के दौरान संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास रामायणी ने दशरथ, दिगंबर अनी अखाड़ा के मंत्री महंत वैष्णवदास ने महर्षि वशिष्ठ तथा हरिद्वार से आए महंत डॉ. वैष्णवदास ने महर्षि विश्वामित्र की भूमिका निभाई। वेदज्ञ पं. इंद्रदेव मिश्र, वेद विद्यालय के आचार्य दुर्गाप्रसाद गौतम, नारद भट्टाराई, आचार्य पवन शुक्ल ने कलश पूजन तथा विवाहोत्सव के अन्य अनुष्ठान संपन्न कराए। 

Posted By: Dharmendra Pandey

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप