अयोध्या : पीएफ घोटाले में पावर कारपोरेशन के जिले के साढ़े तीन सौ से ज्यादा कर्मियों की मेहनत की कमाई भी फंस गई है। कर्मी अपनी जमा पूंजी को लेकर खासे चितित हैं। इसको लेकर कर्मियों ने जोन के मुख्य अभियंता कार्यालय में धरना-प्रदर्शन किया और चेयरमैन को हटाने की मांग की।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले हुए प्रदर्शन में कर्मियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि कार्पोरेशन के चेयरमैन को तत्काल हटाना चाहिए। चेयरमैन ही उप्र पावर सेक्टर इंप्लाइज ट्रस्ट के चेयरमैन हैं। इसलिए उन्हें भी हटाया जाना चाहिए। समिति ने यह भी मांग की है कि में ट्रस्ट में जमा धनराशि के भुगतान की जिम्मेदारी सरकार ले। इस बाबत गजट भी जारी किया जाए।

जिला संयोजक डीसी दीक्षित ने बताया कि 17 मार्च 2017 को डीएचएफएल को पहली किश्त 21 करोड़ रुपये की दी गई थी। एक हफ्ते बाद दूसरी किश्त 33 करोड़ रुपये की दी गई थी। डीएचएफएल को रुपये देने का क्रम दिसंबर 2018 तक जारी रहा। वक्ताओं ने कहाकि घोटाले को छिपाने के लिए ट्रस्ट की हर तिमाही होने वाली बैठक भी बीते 30 महीने में एक बार भी नहीं हुई। दीक्षित ने बताया कि कारपोरेशन कर्मचारियों व अभियंताओं का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। आगामी 18 व 19 नवंबर को 48 घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा। प्रदर्शन में अधीक्षण अभियंता रविद्र गुप्ता, अधिशासी अभियंता मनोज गुप्ता व रोहित सिंह, एसडीओ पंकज तिवारी निखिल नायक, एसपी सिंह, श्रीकांत, अभय चौबे, मनोज मौर्य आदि थे।

Posted By: Jagran

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