अयोध्या : सुबह 10 बजकर छह मिनट पर कार्तिक शुक्ल एकादशी की तिथि लगने के साथ नगरी में पूर्व से ही डेरा डाले श्रद्धालु गहन प्रवाह के रूप में रामनगरी की पंचकोसी परिधि की ओर उन्मुख हुए। हर जुबां पर भगवान का नाम था और दिल में चिर साध साकार करने की ललक। अगले कुछ ही क्षणों में रामनगरी की पंचकोसीय परिधि श्रद्धालुओं से आच्छादित हो उठी। लोग बढ़े चले जा रहे थे। जहां से परिक्रमा शुरू की थी, वहां वापस पहुंचने के लिए। यूं तो इस परिधि पर अपनी सुविधा के अनुसार परिक्रमा शुरू की जा रही थी, पर इस शर्त के साथ कि जहां से परिक्रमा शुरू की गई है, वहीं पूरी करनी है। अधिकांश श्रद्धालुओं के लिए नयाघाट बंधा तिराहा से परिक्रमा शुरू करना सुविधाजनक था।

उन्होंने पहले पुण्यसलिला सरयू में डुबकी लगाई। इसके बाद आस्था की डगर पर पांव आगे बढ़ाए। यह सिलसिला गुरुवार को पूरे दिन चला और शुक्रवार को मध्याह्न तक चलेगा। इस बीच नगरी पांच कोस की परिधि में सघन आस्था की गवाह बनी। आस्था की गवाही देने वालों में बुजुर्गों-प्रौढ़ों से लेकर युवा, बच्चे और महिलाएं भी रहीं। विधायक वेदप्रकाश गुप्त ने सहयोगियों के साथ नंगे पांव परिक्रमा की। ..तो पौराणिक महत्व की पीठ नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास भी श्रद्धालुओं के हुजूम के साथ आस्था की डगर नापने निकले। उदया तिथि के हामी संत शुक्रवार को पौ फटने के साथ परिक्रमा शुरू करने की तैयारी में दिखे। इसी दौरान अयोध्या एवं उससे लगे फैजाबाद शहर के स्थानीय श्रद्धालु भी थोक के भाव पंचकोसी परिक्रमा करेंगे। परिधि से लेकर केंद्र तक बिखरा आस्था का रंग

-रामनगरी गुरुवार को श्रद्धालुओं से पटी रही। श्रद्धालु पंचकोसीय परिधि पर परिक्रमा कर आस्था के साथ परंपरा का रंग बिखेर रहे थे। नगरी के आंतरिक क्षेत्र में अपने अनुराग का लोहा मनवा रहे थे। श्रद्धालुओं की हिलोर कभी इस मंदिर-कभी उस मंदिर। कभी सरयू तट तो कभी रामलला से जुड़ते मार्ग की ओर रुख कर आस्था की छटा बिखेर रही थी।

आस्था के साथ उम्मीदें परिभाषित

पंचकोसी परिक्रमा के साथ आस्था ही नहीं उम्मीदें भी परिभाषित हुईं। सुप्रीम फैसले से जुड़ी वह उम्मीद जिससे 491 वर्ष पुराने मंदिर-मस्जिद विवाद का पटाक्षेप होना है। मधुवनी बिहार से आईं गृहणी अनीतादेवी को पहली बार अयोध्या आने की प्रेरणा सुप्रीम फैसले से जुड़ी उम्मीदों के चलते ही मिली। वे कहती हैं, भले ही पहली बार अयोध्या आई हूं पर अनुकूल फैसला आते ही चाहे जैसे भी होगा पुन: अयोध्या आउंगी। मधुवनी के अध्यापक रामकुमार वर्मा भी लंबे विवाद के पटाक्षेप की उम्मीद से लवरेज हैं और पांच कोस की पदयात्रा वे इसी उम्मीद के प्रति समर्पित करते हैं। बाराबंकी के हैदरगढ़ निवासी युवा विपुल वाजपेयी को अपेक्षित फैसले का इंतजार है। वे स्पष्ट करते हैं कि परिक्रमा और ऐसे ही अनेक अनुष्ठान के माध्यम से हमारी आस्था रामनगरी से ही नहीं उसके केंद्र भगवान राम से भी जुड़ी है। हैदरगढ़ से ही आए सेवानिवृत्त रेलवेकर्मी रामदेव वाजपेयी पूर्व में पांच बार यह परिक्रमा कर चुके हैं। सबसे बड़े फैसले की प्रतीक्षा के बीच यह परिक्रमा उनके लिए यादगार है। रायबरेली से आए कारोबारी रमेश अवस्थी कहते हैं, फैसले के इंतजार के बीच रामलला के प्रति हमारी आस्था और घनीभूत हो गई है और हम परिक्रमा के साथ पूरे प्राण से प्रार्थना करेंगे कि शताब्दियों पुराने विवाद का पटाक्षेप हो। उनकी पत्नी सुधा अवस्थी हैं तो गृहणी पर राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय महत्व के फैसले को लेकर जागरूक नजर आती हैं। कहती हैं, इस विवाद का गरिमामय समापन सबके लिए हितकर है।

Posted By: Jagran

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