अम्बिका वाजपेयी, अयोध्या। राजनीति में हमेशा हॉटकेक बनी रहने वाली रामनगरी एक बार फिर सियासी सरगर्मी के आगोश में है। शिवसेना के आशीर्वाद समारोह और विहिप की धर्मसभा की गूंज भले ही देश की मीडिया में सुनाई दे रही हो लेकिन कोई खामोश है तो वो है अयोध्या...।

एक दिन पहले ही देव दीपावली पर असंख्य भक्तों को स्नान पुण्य प्रदान कर चुकी सरयू की लहरें भी शांत दिखीं। हवाई पट्टी के बाहर उद्धव के आने को लेकर चल रही नारेबाजी और प्लेटफार्म पर मुंबई से आए शिवसैनिकों का उद्घोष भले ही बाहर से आए श्रद्धालुओं के लिए कौतुक का विषय हो, लेकिन 90 से अब तक तमाम सियासी लहरों को उठते-गिरते देख चुके सरयू तटवासी निर्विकार हैं। बहुत टटोलने पर सिर्फ पूर्व शिक्षक राघवेंद्र कहते हैं कि करोड़ों हिंदुओं के मन में तो मंदिर बना ही है, बस साकार हो जाए। जन्मभूमि के कण-कण में राम हैं, लेकिन कष्ट तो यह है कि मामला बहुत लंबा खिंच गया। बस स्टेशन के पास ई-रिक्शा चला रहे अकील कहते हैं कौन मुसलमान विरोध करने जा रहा है और कौन हिंदू वहां बनाने जा रहा है। दोनों धर्मों के तथाकथित रहनुमाओं के बीच की लड़ाई है ये। यह मसला अब सुलझना चाहिए ताकि राजनेता कुछ दूसरे मसलों पर बात कर सकें। हर गली पर पहरा और दरवाजे पर खाकी रामनगरी के लोगों की आदत में शुमार हो चुका है। 

कल बंद रहेंगी गाड़ी

बायपास पर एक सवारी लखनऊ... की आवाज लगा रहे परिचालक के पास युवक पहुंचा। युवक ने पूछा कितनी देर में चलोगे। जवाब मिलता है बस दस सवारी हो जाएं तो चलूं। युवक अंदर झांककर देखता है तो ट्रेवलर खाली थी। युवक हंसते हुए एक भी सवारी है नहीं, कहते हो दस हो जाएं तो चलूं... चालक खीझ जाता है और जवाब मिलता है जब कोई आया नहीं तो जाएगा कौन? इसलिये कल गाड़ी नहीं चलाऊंगा। यह किस्सा हर उस दुकानदार और बाशिंदे का है, जिसके धंधे को सियासी सरगर्मी मंदा कर देती है।

योगी ने बढ़ाया मान

अविनाश यादव कहते हैं देखिए मैं भाजपा समर्थक नहीं लेकिन, योगी जी ने यहां का मान बढ़ाया है। इससे पहले यहां पर कोई भी आयोजन करने से कोई भी सरकार डरती थी लेकिन, योगी सरकार दो वर्ष से यहां भव्य आयोजन करके नगरी को देश में अलग पहचान दिलाई। हालांकि उन्होंने राम की बड़ी मूर्ति लगाने के फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि अयोध्या के हर घर मंदिर और राम हैं लेकिन मसला तो सिर्फ मंदिर का है।

 

Posted By: Nawal Mishra

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