अयोध्या, जेएनएन। कोर्ट की लम्बी लड़ाई के बाद रामनगरी अयोध्या में अब मंदिर-मस्जिद विवाद समाप्त हो गया है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन की तैयारी के बीच रविवार को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन का मालिकाना हक सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया गया।

अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने मस्जिद की पांच एकड़ जमीन का मालिकाना हक का कब्जा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दे दिया है। ट्रस्ट इस जमीन पर एक मस्जिद के अलावा अस्पताल और रिसर्च सेंटर बनाएगा। यह भी तय है कि यहां पर बनने वाली इस मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर नहीं रखा जाएगा। एक लंबे आंदोलन के दौरान बाबर का नाम लोगों की नफरत का हिस्सा रहा, इसलिए उसे मस्जिद से नहीं जोड़ा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच अगस्त को अयोध्या में श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन करेंगे, जिसके बाद मंदिर निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। इस भूमि पूजन से तीन दिन पहले रविवार को अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने मस्जिद की पांच एकड़ जमीन का मालिकाना हक सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को सौंप दिया। वक्फ बोर्ड की इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के प्रतिनिधिमंडल ने जमीन के कागजात जिलाधिकारी से प्राप्त किया। ट्रस्ट ने साफ कर दिया है कि अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का नाम अब बाबरी मस्जिद नहीं होगा।

बाबरी मस्जिद नहीं होगा नाम

ट्रस्ट इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के सचिव अतहर हुसैन ने साफ तौर पर कहा कि बाबर के नाम पर मस्जिद का नाम नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मस्जिद खुदा का घर होता है, ऐसे में उसका नाम किसी राजा के नाम पर हो या रंक के नाम पर, यह मायने नहीं रखता है। यहां लोग इबादत करने आएंगे। ऐसे में उनकी आत्मा और इबादत के प्रति उनकी पवित्रता मायने रखती है। उन्होंने कहा अभी मस्जिद के नाम से ज्यादा हमारे लिए वहां निर्माण कार्य शुरू करना अहम है। उन्होंने कहा कि कोरोना से कुछ राहत मिलते ही ट्रस्ट बैठक करेगा और पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद निर्माण के साथ अस्पताल, विद्यालय और रिसर्च सेंटर भी स्थापित करने की रूप रेखा पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

अतहर हुसैन ने बताया कि अब जल्द ही ट्रस्ट की बैठक बुलाकर आगे की योजना तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की अगली बैठक में छह मनोनीत सदस्यों के नाम को लेकर भी मंथन करेंगे। हमारी कोशिश है कि देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को शामिल कर उन्हेंं प्रतिनिधित्व दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत अयोध्या में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ भूमि दी गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीती पांच फरवरी को ही अयोध्या जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम धन्नीपुर तहसील सोहावल में थाना रौनाही से करीब 200 मीटर पीछे पांच एकड़ जमीन मस्जिद के लिए आवंटित की थी। इसी जमीन का मालिकाना कब्जा इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट अध्यक्ष जुफर फारुखी, वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सैय्यद मो. शोएब और ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने अयोध्या के जिलाधिकारी से लिया।

इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट का गठन 

बाबरी मस्जिद के बदले मिली पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने पिछले हफ्ते इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट का गठन कर किया है। ट्रस्ट में अधिकतम 15 सदस्य होंगे। वक्फ बोर्ड ने निर्माण के लिए ट्रस्ट के 9 सदस्यों के नाम घोषित किया है। अब बाकी छह का मनोनयन होगा। पांच एकड़ जमीन पर ट्रस्ट की मस्जिद के अलावा क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर बनाने की योजना है।

सरकार ने बाबरी मस्जिद की पांच एकड़ की जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दी है। उनके आस-पास कई गांवों नें बड़ी तादात में मुस्लिम रहते हैं और कई मस्जिदें भी हैं। ट्रस्ट चाहता है कि यहां एक रिसर्च सेंटर बने। जहां भारत में मुसलमानों के इतिहास और भारतीय संस्कृति में उनकी हिस्सेदारी पर रिसर्च हो। इसके साथ ही लाइब्रेरी और म्यूजियम भी बनाया जाएगा ताकि अन्य पहलुओं को भी उजागर किया जा सके। ट्रस्ट यह भी चाहता है कि दो वर्गों के बीच इस मामले को लेकर जो जख्म लगे हैं वो अब भरे जाएं और अयोध्या में एक बेहतर माहौल बनाया जाए।  

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