अयोध्या : रामनगरी को समेटने वाली फैजाबाद संसदीय सीट को यूं ही भगवा दुर्ग नहीं कहा जाता है। एक बार फिर यहां भाजपा उम्मीदवार की जीत से साफ हो गया है कि भगवा दुर्ग और मोदी मैजिक का गठजोड़ हो तो कोई भी गठबंधन उसे शिकस्त नहीं दे सकता है। चुनाव परिणाम से साफ हो गया कि भगवा दुर्ग में न सिर्फ मोदी मैजिक मतदाताओं के सिर चढ़ कर बोला, बल्कि उसने सरयू-गोमती नदी के सियासी मझधार में सपा, बसपा एवं रालोद के जातीय तिलिस्म को डुबो दिया।

अब 2019 के लोकसभा चुनाव की तस्वीर साफ हो चुकी है। फैजाबाद संसदीय क्षेत्र में लगातार दूसरी बार भाजपा के उम्मीदवार लल्लू सिंह विजय पताका फहराने में कामयाब रहे। यहां से उन्हें लगभग 50 फीसद मत मिले और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी आनंदसेन यादव महज 40 फीसद मत पर ठिठक गए। जाहिर सी बात है कि जिन पिछड़ी और अनुसूचित जातियों के साथ मुस्लिम मतदाताओं की एकजुटता के भरोसे सपा ने यूपी सरकार के पूर्व मंत्री व तीन बार सांसद रहे मित्रसेन यादव के पुत्र आनंदसेन यादव को भाजपा सांसद लल्लू सिंह के मुकाबले मैदान में उतारा था, वह चुनाव परिणाम के साथ धराशायी हो चुका है। ऐसा भी नहीं है कि यहां सपा के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं थीं। यहां का जातीय समीकरण उसे कागजी ²ष्टि से काफी मजबूत बना रहा था, लेकिन शशि कांड का दाग अनुसूचित मतदाताओं खासतौर से पासी बिरादरी में उन्हें स्वीकार्य नहीं बना सका।

कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री के पांव तो चुनावी समर में एकदम नहीं टिक सके। उन्हें महज पांच फीसद मतों से संतोष करना पड़ा। खत्री को पिछली बार से आधे मत भी नहीं मिले। यहां कभी डीएम के रूप में अपनी ईमानदारी की छाप छोड़ने वाले पूर्व ब्यूरोक्रेट विजयशंकर पांडेय की उम्मीदें एकदम से परवान नहीं चढ़ सकीं।

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Posted By: Jagran

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