अयोध्या : कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर अलर्ट मोड पर हैं। वहीं विधानसभा चुनाव की तिथियां घोषित हो चुकी हैं। ऐसे में शासन के साथ प्रशासन की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। कोविड की तीसरी लहर से बचाव को लेकर शासन ने स्वास्थ्य कर्मियों व अधिकारियों को निर्वाचन प्रक्रिया से बाहर रखने का निर्देश दिया है। साथ ही महकमे के वाहनों का उपयोग भी चुनाव कार्य में नहीं किया जाएगा।

वर्तमान समय में जिले में कोरोना के 525 सक्रिय केस हैं। प्रतिदिन सौ से अधिक नए मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी बढ़ गई है। मरीजों की देखभाल और कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के उपाय अपनाए जा रहे हैं। इसी बीच चुनाव प्रकिया सकुशल निपटाना भी प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए चुनाव आयोग ने रैली, नुक्कड़ सभा, रोड शो आदि पर रोक भी लगा रखी है। मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने शासनादेश जारी कर सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी अधिकारियों- कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से दूर रखा जाय। कोविड में उनकी भूमिका पहले से ही बढ़ गई है। कोविड प्रबंधन का कार्य निर्वाचन प्रबंधन का भाग है। विभाग के कर्मचारियों व संसाधनों को उपयोग इसे रोकने में किया जाए।

चुनाव कार्य अनिवार्य सेवा के दायरे में

अयोध्या: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 60 (सी) के तहत राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों को निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यों के लिए अनिवार्य सेवा के दायरे में लाया है। यह जानकारी: जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी नितीश कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि सूचना, स्वास्थ्य, डाक एवं तार विभाग, ट्रैफिक, रेल, विद्युत, नागरिक उड्डयन, आकाशवाणी, दूरदर्शन, भारतीय संचार निगम को अनिवार्य सेवा में शामिल किया गया हैं। इन विभागों के कर्मचारियों को विशेष रूप से अपने तैनाती/सेवा स्थल पर डाक मत पत्र की सुविधा मिलेगी। संबंधित कार्यालयाध्यक्ष उस विधानसभा क्षेत्र के चुनाव अधिकारी के माध्यम से पोस्टल बैलेट/डाक मत पत्र की सुविधा देंगे।

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