अयोध्या: नव्य अयोध्या के अब धरातल पर उतरने का समय निकट आ गया है। आवास विकास परिषद बोर्ड की भी स्वीकृति मिल जाने के बाद परियोजना ने अपनी अंतिम बाधा भी पार कर ली है। अब जमीन अधिग्रहण के लिए कार्रवाई की जाएगी। परियोजना को बेहतर स्वरूप प्रदान करने के लिए निर्माण के क्षेत्र में सलाहकार की तलाश तेज हो गई है। सलाहकार ही योजना का मास्टर प्लान तैयार करेगा। नव्य अयोध्या के रूप में सरकार की इच्छा रामनगरी को सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित करना है। नव्य अयोध्या से रामनगरी का नवनिर्माण तय होगा। अभी तक इस योजना को मूर्त रूप देने में आवास विकास परिषद और अयोध्या विकास प्राधिकरण संयुक्त शिल्पी की भूमिका में हैं। राममंदिर के साथ ही नव्य अयोध्या का निर्माण भी शीघ्र शुरू कराना शासन की प्राथमिकता में है। तीन दिन पहले आवास विकास परिषद के बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। शासन ने अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व नगर आयुक्त विशाल सिंह पर इस परियोजना को साकार करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। रामनगरी से सटे सदर तहसील क्षेत्र के तीन गांवों में नव्य अयोध्या विस्तार लेगी। इसमें माझा बरहटा, शाहनवाजपुर, तिहुरा शामिल हैं। नव्य अयोध्या 1190 एकड़ में विस्तार लेगी। नगर आयुक्त विशाल सिंह मानते हैं कि नव्य अयोध्या रामनगरी के विकास को शिखर तक ले जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार राममंदिर के निकट नई टाउनशिप विकसित करना चाहती है।नव्य अयोध्या का स्वरूप वैदिक के साथ स्मार्ट भी होगा। परियोजना पर चार हजार करोड़ रुपये का व्यय आएगा। योजना को लेकर चिह्नित गांवों में सर्वे का कार्य तेजी से चल रहा है। परियोजना के तहत पांच फाइव स्टार, 10 थ्री स्टार व 15 बजट होटल पर्यटकों के लिए बनेंगे। न्यूनतम 24 मीटर की सड़क व उसके किनारे ग्रीन बेल्ट होगी।

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