अयोध्या : रामनगरी को समाहित किए फैजाबाद संसदीय सीट पर जीत हासिल करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए प्रतिष्ठापरक होता है। यूं भी रामनगरी का मिजाज सियासी तौर पर अलहदा है। इस सीट पर अब तक किसी को भी लगातार दो बार से ज्यादा जीत नहीं मिल सकी और ये मुकाम हासिल करने वाले भी सिर्फ दो ही नेता हैं। इनमें एक कांग्रेस के दिवंगत रामकृष्ण सिन्हा और दूसरे भाजपा के विनय कटियार। यही नहीं, अब तक हुए कुल 16 लोकसभा चुनाव में इस सीट पर हार-जीत का अंतर सिर्फ तीन मौकों पर ही लाख वोटों के पार गया है। तीनों ही बार संबंधित दलों की लहर ने जीत का भारी अंतर बढ़ाया।

लाख वोटों की पहली जीत आपातकाल के बाद जेपी आंदोलन की छाया में वर्ष 1977 के चुनाव में मिली थी। तत्समय भारतीय लोकदल के उम्मीदवार रहे अनंतराम जायसवाल ने कांग्रेस के दोबार सांसद रहे रामकृष्ण सिन्हा को एक लाख 47 हजार 783 वोटों से हराया था। वे पहले ऐसे नेता थे, जिन्हें लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल हुई। दूसरी बार यह मौका वर्ष 1984 में हुए लोस चुनाव में आया। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को आम जनता की जबर्दस्त सहानुभूति मिली थी। उस चुनाव में कांग्रेस से पहली बार किस्मत आजमाने वाले निर्मल खत्री ने सीपीआइ से चुनाव लड़े दिवंगत मित्रसेन यादव को एक लाख चार हजार 492 वोट से हराया था। तीसरी बार यह मौका तीन दशक के बाद आया। वर्ष 2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर ने मौजूदा सांसद लल्लू सिंह को फैजाबाद संसदीय इतिहास की सबसे बड़ी जीत दी। लल्लू सिंह को चार लाख 91 हजार 663 मत मिला, जबकि समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े मित्रसेन यादव को दो लाख आठ हजार 986 वोट हासिल हुआ था। इस प्रकार लल्लू सिंह ने दो लाख 82 हजार 677 मतों की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। इसके अलावा शेष 13 लोकसभा चुनाव में कोई भी उम्मीदवार जीत के अंतर को लाख वोटों के आंकड़े तक नहीं ले जा सका।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप