अयोध्या : रामनगरी में रेल अरसे से आतंकियों के निशाने पर रही है। साबरमती एक्सप्रेस बम कांड और अयोध्या रेलवे स्टेशन पर विस्फोटक मिलने की घटनाओं से यह बात पहले भी सामने आ चुकी है। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले वर्ष 2000 में रौजागांव रेलवे स्टेशन पर खड़ी साबरमती एक्सप्रेस में हुआ बम धमाका रेलवे की स्याह तारीखों में से एक था, जिसमें कई यात्रियों की मौत हो गई थी। इससे पूर्व वर्ष 1999 में अयोध्या रेलवे स्टेशन से जिलेटिन राड की बरामदगी ने सुरक्षा तंत्र के होश उड़े दिए थे। इस साजिश के बल पर आतंकियों की मंशा रामनगरी में चैत्र रामनवमी मेले में आई श्रद्धालुओं की भीड़ को निशाना बनाना था, लेकिन साजिश नाकाम हुई। विस्फोटक को निष्क्रिय करने में तत्कालीन एसएसपी अनिल अग्रवाल घायल हो गए थे। सिर्फ यही दो घटनाएं नहीं बल्कि षड़यंत्र के कुछ और भी उदाहरण मौजूद हैं। करीब चार वर्ष पूर्व पटरंगा क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर इंगल डाल कर ट्रेन को बेपटरी करने का प्रयास किया गया था। रेल कर्मियों ने इंगल रखते हुए दो बालकों को पकड़ कर रेलवे पुलिस के सुपुर्द किया था, लेकिन आज तक इस कुत्सित प्रयास के पीछे का मास्टर माइंड नहीं पकड़ा जा सका। इसे बच्चों की गलती मानते हुए प्रकरण रफादफा कर दिया गया। रविवार को रेल पुल संख्या 297 से बोल्ट गायब होने का प्रकरण भी सामान्य नहीं है। हमेशा से ट्रैक से पैनडाल क्लिप गायब होने की घटना को नशेड़ियों की हरकत बताने वाली रेलवे सुरक्षा एजेंसियां इस प्रकरण को भी मामूली मान रही हैं, लेकिन रेल विभाग में इस घटना को लेकर हड़कंप है।

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रेलवे ट्रैक की निगरानी पर सवाल

-रेलवे से जुड़े एक स्थानीय अधिकारी की मानें तो इस घटना को रेलवे ने गंभीरता से लिया है। रेल पथ की निगरानी एवं सुरक्षा से जुड़े कई अधिकारियों को स्पष्टीकरण देना होगा। रेलवे सुरक्षा एजेंसियों से लेकर पेट्रोलिग करने वाले कर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी। रेल पुल से बोल्ट गायब होने की घटना ने रेलवे ट्रैक की निगरानी पर सवाल खड़ा कर दिया है। मेट, की-मैन, ट्रैक मैन, एवं पेट्रोलिग टीम के साथ रेलवे सुरक्षा एजेंसियों पर ट्रैक निगरानी की जिम्मेदारी है। बावजूद इसके रेल पुल से बोल्ट लापता हो गए। आरपीएफ एवं इंजीनियरिग अनुभाग की ओर से ज्वाइंट नोट तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंप दिया गया है, लेकिन इसमें शामिल विवरण को गोपनीय रखा गया है।

Edited By: Jagran