अयोध्या : रविवार को दिल्ली में प्रस्तावित विहिप की धर्मसभा पर रामनगरी की निगाह लगी हुई है। मंदिर निर्माण के दावे के साथ रामनगरी 25 नवंबर को धर्मसभा की साक्षी बन चुकी है, जिसमें लाखों रामभक्त शामिल होकर यह जता चुके हैं कि मंदिर निर्माण की आकांक्षा ठांठें मार रही है और उसकी अनदेखी संभव नहीं है। मंदिर निर्माण से जुड़ी यही आकांक्षा सोमवार को देश की राजधानी में और व्यापक होकर बयां होगी। विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा के अनुसार दिल्ली की धर्मसभा न केवल उस संसद और सुप्रीमकेार्ट के मुहाने पर होने की वजह से कहीं अधिक निर्णायक होगी, जिसे मंदिर निर्माण की राह प्रशस्त करनी है बल्कि इसमें अयोध्या की धर्मसभा में मौजूद दो लाख रामभक्तों के मुकाबले पांच लाख रामभक्त शामिल होंगे। रामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमारदास कहते हैं, मौजूदा केंद्र सरकार राष्ट्र मंदिर के निर्माण में तो पूरी निष्ठा से संलग्न है पर उसका ध्यान राम मंदिर की ओर भी आकृष्ट कराया जाना सर्वथा जायज है। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के अनुसार मंदिर निर्माण की प्रतीक्षा असह्य होती जा रही है और सोमवार को दिल्ली में उमड़नेवाले मंदिर समर्थकों का सैलाब सरकार को अपनी भूमिका स्पष्ट करने के लिए विवश करेगा। कोई शक नहीं कि मौजूदा केंद्र सरकार का कार्यकाल जिस गति से पूर्णता की ओर है, उसी अनुपात में मंदिर निर्माण से जुड़ी व्यग्रता बढ़ती जा रही है। रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में दूरस्थ क्षेत्रों से आए शिष्यों को पत्थर तराशी का दिखाने आए नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास कहते हैं, संसद हो या सुप्रीमकोर्ट मंदिर निर्माण को लेकर उनकी आंख खुलनी चाहिए। तिवारी मंदिर के महंत गिरीशपति त्रिपाठी की मानें तो दिल्ली की धर्मसभा मंदिर निर्माण का भविष्य तय करेगी।

Posted By: Jagran