आनन्द राय, अयोध्या। दीप पर्व पर देश-दुनिया का ध्यान खींचने वाली अयोध्या इस समय उत्साह और उमंग के साथ ही संशय के दौर से गुजर रही है। प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए शुरू हुए आंदोलन ने विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयं संघ, शिवसेना और हिंदू संगठनों के साथ ही आमजन का भी उत्साह बढ़ा दिया है लेकिन, 26 वर्ष पहले छह दिसंबर को ढांचा ध्वंस के बाद उत्पन्न हुए हालात को याद कर लोग सहमे भी हैं। विश्व हिंदू परिषद ने रविवार को बड़े भक्त माल की बगिया में विराट धर्मसभा का आयोजन किया है जिसमें तीन लाख से ज्यादा लोगों के जुटने का दावा है जबकि इसके पहले शनिवार को लक्ष्मण किला में शिवसेना 1100 संतों को सम्मानित करने जा रही है। मकसद एक होने के बावजूद विहिप और शिवसेना के बीच मतभेद बने हुए हैं। 

कब क्या हो कहा नहीं जा सकता

पखवारे भीतर ही छह दिसंबर आने वाला है। 1992 में इसी तारीख को अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के लिए वैसी ही भीड़ जुटी थी, जैसी विहिप ने बुलाई है। तब ढांचा ध्वंस हुआ था लेकिन, उसके बाद लंबे समय तक अयोध्या ने दिक्कतों का सामना किया। यहां के निवासी राम शब्द कहते हैं कि भीड़ पर किसी का नियंत्रण नहीं होता, इसलिए कब क्या हो जाए, कहा नहीं जा सकता। लोग अभी से सब्जी, दाल, और रोजमर्रा की चीजों से घर भरने लगे हैं। हालांकि सरकार ने सुरक्षा के चौकस इंतजाम किये हैं और कहीं कोई घटना न हो, इसके लिए अफसरों की जवाबदेही तय की गई है।

कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालु थोड़ा कम 

शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा के मेले का समापन था। इस बार आने वाले श्रद्धालु भी थोड़ा कम आये। अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार की दोपहर को ही अयोध्या की सड़कों पर आवागमन सुचारु रूप से चलने लगा। पंचकोसी से झुनझुनिया घाट तक सड़क रोजमर्रा की ही तरह दिखी। पहले कार्तिक पूर्णिमा के दिन अयोध्या से गुजर पाना आसान नहीं होता था। यह पुलिस की चौकसी का ही नतीजा है पर, राम मंदिर निर्माण के लिए छटपटाहट भी खूब है। लक्ष्मण किला के करीब लालकोठी के पास रहने वाली चारुशिला सहचरी कहती हैं कि राम मंदिर बनना चाहिए। अब देर न हो। वह कहती हैं कि प्रभु श्रीराम कुछ ना होने देंगे। मणिराम दास छावनी के पुजारी मोहनदास जयश्रीराम का जयकारा करते हैं। 

 

विहिप ने लगाई ताकत 

विश्व हिंदू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय, केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज बड़े भक्त माल की बगिया में मंच तैयार कराने से लेकर पूरी व्यवस्था में सक्रिय मिले। क्षेत्रीय सांसद लल्लू सिंह भी साथ में मौजूद थे। पूर्व सांसद राम विलास वेदांती भी बाद में आये। विहिप और संघ ने इस आयोजन के लिए पूरी ताकत लगा दी है। राजेंद्र सिंह पंकज कहते हैं कि राम मंदिर कबका बन गया होता लेकिन, तथाकथित सेकुलर समाज ने रोड़ा अटका दिया। वह कांग्रेस के कपिल सिब्बल पर सीधे हमला करते हैं। जहां धर्मसभा होनी है उसके पीछे रघुनाथ दास जी की छावनी की भव्य दीवार है। अयोध्या में इसे बड़ी छावनी भी कहा जाता है। जगदीश दास इस छावनी के महंत हैं और मान्यता के मुताबिक वह इस छावनी से बाहर कभी नहीं? निकलते।

तप बल पर आक्रांताओं से रक्षा

चंपत राय, लल्लू सिंह और अन्य सहयोगी आदर से उनकी चर्चा करते हैं और कहते हैं कि इन्हीं संतों के त्याग और तपस्या के बल पर आक्रांताओं से यहां की रक्षा हुई। चंपत राय कहते हैं कि इस मैदान में धान की खेती थी। दस नवंबर को देखा और 12 नवंबर को पूजन कराया। धान कट गया है और अब यहां मंच तैयार हो रहा है। प्रभु श्रीराम सब कुछ सकुशल संपन्न करा देंगे। राम जन्म भूमि न्यास के सदस्य और पूर्व सांसद राम विलास वेदांती को जमशेदपुर की धर्मसभा में रहना है इसलिए वह यहां की व्यवस्था में योगदान देने आये हैं। वह दावा करते हैं कि तीन लाख लोग जुटेंगे लेकिन, चंपत राय भीड़ के नाम पर किसी भी तरह के दावे से बचते हैं। 

साधु-संतों की सभा तो नेता क्यों बुलाएं 

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शनिवार को ही अयोध्या आ रहे हैं। रविवार को विराट धर्म सभा के मंच पर उनकी मौजूदगी का सवाल चंपत राय को चुभता है। वह कहते हैं कि यह संतों की सभा है। यहां किसी नेता का क्या काम। हालांकि जब पूछा जाता कि क्या कोई भी नेता मंच पर नहीं रहेगा तो वह कहते हैं कि जिसे आप नेता समझ रहे वो जब कुछ भी नहीं थे तो विहिप के कार्यकर्ता थे। उनका इशारा भाजपा के कुछ नेताओं की ओर रहता है। वह शिवसेना सांसद संजय राउत के बयान पर सहमति भी जताते हैं कि हम सबका मकसद एक ही है लेकिन, वेदांती शिवसेना पर हमलावर हैं। वह कहते हैं कि जब जेल जाना हुआ और आंदोलन करना पड़ा तब शिवसेना कहां थी। तब तो उद्धव अयोध्या आये भी नहीं। अब तो पका-पकाया मामला है तो उद्धव श्रेय लेने आ रहे हैं। 

 चिता सजाए परमहंस ने योगी- मोदी को घेरा 

राम मंदिर के लिए आंदोलनरत श्री तपस्वी जी की छावनी के महंत परमहंस महाराज ने खुद अपनी चिता सजा ली है। परमहंस ने शुक्रवार को अपनी ही चिता का पूजन किया। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर राम मंदिर बनने का रास्ता नहीं निकला तो वह छह दिसंबर को प्राण त्याग देंगे। तब उनके आत्मदाह के बाद जो आंदोलन भड़केगा उसे कोई रोक नहीं पायेगा। वह विहिप के आयोजन पर कहते हैं कि अगर गोली चली तो विहिप, बजरंग दल या कोई धर्माचार्य नहीं मरेगा। गोली जनता खाएगी। इसलिए अगर भाजपा राम मंदिर का पक्षधर है तो मंदिर बनाए। वह शिवसेना पर भी हमला करते हैं। उनका कहना है कि शिवसेना के लोग कहते हैं कि ढांचा हमने गिराया। तब तो कांग्रेस की सरकार थी लेकिन, आज केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है और मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तैयार है तो मंदिर क्यों नहीं बनाते हैं। उन्होंने मोदी और योगी को भी घेरा। कहा, वह अनशन पर थे तो योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री से बात कराएंगे। भरोसा किया लेकिन बात नहीं कराए। अयोध्या आये तो मैं सवाल न कर दूं इसलिए मुझे नजरबंद करा दिया। 

शिवसेना का आयोजन छोटा पर जोश कम नहीं 

विहिप के आयोजन के मुकाबले एक दिन पहले होने वाला शिवसेना का आयोजन बहुत छोटा है लेकिन, शिवसैनिकों का जोश कम नहीं है। महाराष्ट्र के पालगर में सब्जी बेचने वाले अनंत दत्तात्रेय पाटिल रविवार को मोटर साइकिल से चलकर मंगलवार को यहां आ गये। कहते हैं कि मंदिर बनना चाहिए। लक्ष्मण किला मैदान में नौ दिनों से राम कथा चल रही है और शुक्रवार को पंडित सीताराम नाम शरण महाराज समापन करने वाले हैं। शिवसेना संसदीय दल के नेता संजय राउत यहां पर व्यवस्था में लगे हैं और लक्ष्मण छावनी के महंत मैथिली रमण शरण महाराज उनके उत्साह को बढ़ाने में जुटे थे। महंत ने कहा कि राम मंदिर बनना चाहिए। उत्साह तो महाराष्ट्र के ही नानगांव इलाके से आये मोहन यादव और उनके पिता उद्धव यादव में भी दिखता है। सात नवंबर को मुंबई से आटो रिक्शा लेकर चले पिता-पुत्र 16 नवंबर को ही यहां आ गये थे। तबसे वह माहौल बना रहे हैं। मोहन बताते हैं कि 2250 किलोमीटर की यात्रा में उन लोगों ने 80 लीटर पेट्रोल जलाया। यह आटो शिवसेना और राम मंदिर के नारों, पोस्टर से सजा है और लाउडस्पीकर भी हमेशा बजता है।  

Posted By: Nawal Mishra