रविप्रकाश श्रीवास्तव, अयोध्या

गत वर्ष पांच अगस्त को राममंदिर की आधारशिला रखने के साथ ही रामनगरी को धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाने की मंशा का सूत्रपात भी हुआ था। केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रयास से आस्था का केंद्र मानी जाने वाली रामनगरी की पहचान अब पर्यटन नगरी के रूप में भी प्रतिष्ठित होने लगी है। अयोध्या की धार्मिक महत्ता यूं तो देश-दुनिया के पर्यटकों को हर वर्ष अयोध्या खींच लाती है, लेकिन राममंदिर के भूमि पूजन के साथ अयोध्या में पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशें भी परवान चढ़ रही हैं। सरकार पर्यटकों को रामनगरी से जोड़ने की योजना पर नए सिरे से कार्य कर रही है। पर्यटन विभाग के सहयोग से उत्तर प्रदेश टूरिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन एवं वाराणसी टूरिज्म गिल्ड रामनगरी में पर्यटन विकास की संभावनाएं तलाशने के साथ विशेष यात्रा पैकेज में अयोध्या दर्शन को भी शामिल कर रहे हैं, वहीं केंद्र की ओर से भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम भी अपने धार्मिक यात्रा पैकेज में रामनगरी को शामिल कर पर्यटकों को अयोध्या के महात्म्य से परिचित करा रहा है। यही नहीं पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटकों को रामनगरी के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए 200 से अधिक टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षित किया गया है। एक अच्छा टूरिस्ट गाइड पर्यटन व्यवसाय की पहली कड़ी माना जाता है। इसके अतिरिक्त नवीन बस स्टेशन बनाने के साथ पर्यटन सुविधा केंद्र, रामायण क्रूज, रामायण थीम पार्क, कुंड व घाटों का सुंदरीकरण सहित कई ऐसी योजनाएं प्रस्तावित हैं, जो आने वाले समय में रामनगरी के पर्यटकों की सुविधा और आकर्षण का केंद्र होंगी। देश के विभिन्न राज्यों से पर्यटकों को अयोध्या दर्शन कराने के बाद उन्हें लेकर वाराणसी रवाना हो रहे आइआरसीटीसी के सहायक प्रबंधक बीपी पांडेय कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आइआरसीटीसी पूरी तत्परता से लगा हुआ है।

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