अयोध्या [आनंद मोहन]। भगवान राम की नगरी अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि न्यास को अधिगृहीत परिसर में परिसंपत्तियों का मुआवजा 20 लाख 36 हजार 296 रुपये मिलेगा। क्लेम कमिश्नर शिवपूजन ने न्यास की तरफ से कराए गए विकास कार्यों के लिए यह क्लेम मंजूर किया है।

विकास कार्यों में राम चबूतरा, शेषावतार मंदिर, सीमेंट स्टोर,प्रशासनिकभवन, स्वागत कक्ष आदि शामिल है। सालाना एक रुपये के पट्टे पर यह भूमि तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार ने श्रीरामजन्म भूमि न्यास को दी थी। अधिग्रहण के बाद विहिप नेता अशोक सिंघल ने क्लेम कमिश्नर की अदालत में केस दाखिल किया था।

सिंघल के निधन के बाद उनके स्थान पर पक्षकार बने विहिप के चंपत राय ने सुप्रीम कोर्ट से मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला आने के बाद क्लेम की धनराशि राम मंदिर निर्माण कराने वाले ट्रस्ट को देने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। निर्णीत मुआवजा के बारे में कोर्ट ने उनके प्रार्थनापत्र पर अनुपालन का आदेश दिया है।

सुप्रीम फैसले के बाद अधिगृहीत परिसर से जुड़े क्लेम से संबंधित सभी मुकदमों का निस्तारण क्लेम कमिश्नर ने कर दिया है। इनकी संख्या लगभग 10 थी। क्लेम कमिश्नर की अदालत से सबसे बड़ा झटका नजूल की भूूमि को लेकर जिलाधिकारी व पर्यटन अधिकारी को लगा है।

राम मंदिर के पक्ष में अधिगृहीत भूमि देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दोनों का क्लेम नहीं माना गया। क्लेम कमिश्नर की अदालत से रामचरित मानस भवन ट्रस्ट को भी झटका लगा है। ट्रस्ट ने प्रतिकर धनराशि का ब्याज दिलाने का क्लेम किया था। क्लेम कमिश्नर ने उसे नामंजूर कर दिया। मूर्तियों की वापसी का उसका दावा कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। ट्रस्ट से जुड़े राधेश्याम अग्रवाल को मूर्तियां तो वापस मिलेंगी लेकिन प्रतिकर का ब्याज नहीं मिलेगा। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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