अयोध्या : डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कर्मचारी व अन्य जिम्मेदार अपने कार्यों को कितनी जिम्मेदारी के साथ करते हैं? आपको इसका उदाहरण बताते हैं। मामला सुल्तानपुर के संत तुलसीदास पीजी कॉलेज कादीपुर में पढ़ने वाली छात्रा के अंकपत्र का है, जो इन दिनों वायरल हो रहा है। यह अंकपत्र एमएड द्वितीय वर्ष का है। पूर्णांक से अधिक प्राप्तांक की मार्कशीट पर प्रधानाचार्य का हस्ताक्षर भी है। यह मार्कशीट परीक्षा विभाग में जांच कर संबंधित लिपिकों के हस्ताक्षर होने के बाद जारी की गई।

बता दें मार्कशीट की जांच के लिए लिपिक की तैनाती होती है। अतिरिक्त देय भी दिया जाता है। अंकपत्र जांचने वाला लिपिक तथ्यों की जांच करता है। उसकी जिम्मेदारी है कि अंकपत्र में गलत तथ्य न अंकित हो। यदि तथ्य गलत है तो अंकपत्र को निरस्त कर सकता है। ये अंकपत्र किसने जांचा, गलत अंक कैसे जारी हुआ, यह सब जांच का विषय है। देखना है कि विश्वविद्यालय कार्रवाई करता है नहीं। साकेत महाविद्यालय छात्रसंघ उपमंत्री विशाल वैश्य ने गलत अंकपत्र जारी करने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की। कहा इस तरह के लापरवाही से विवि की छवि धूमिल हुई है। इसका भुगतान छात्रों को करना होता है। परीक्षा नियंत्रक उमानाथ ने बताया कि मामले की जानकारी है। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -------------------- अंकपत्र का ब्योरा : पूर्णाक 1200 मिले 1209 अंक अयोध्या : यह मार्कशीट एमएड की है। 2018 के इस अंकपत्र का रोल नंबर 1980511 है। इस अंकपत्र पर 1200 में से 1209 अंक दर्ज है। एमएड प्रथम वर्ष का प्राप्तांक, पूर्णांक से 161 अंक अधिक है। प्रथम वर्ष में 600 में छात्रा के 761 अंक हैं। एमएड प्रथम द्वितीय वर्ष में 600 में 448 अंक मिले।

Posted By: Jagran

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