अयोध्या : मंगलवार को सुबह परिधि से होता हुआ आस्था का ज्वार बुधवार को सुबह 14कोसी परिक्रमा थमने के साथ रामनगरी की पोर-पोर तक में व्याप्त हुआ। अधिकांश श्रद्धालुओं ने मंगलवार की रात तक परिक्रमा पूरी कर ली थी पर ऐसे भी कम नहीं रहे, जिन्होंने बुधवार को मुहूर्त के आखिरी चरण तक परिक्रमा पूरी की। मंगलवार को परिक्रमा पूरी करने वाले रात्रि विश्राम के साथ बुधवार को तरो-ताजा होकर निकले। अधिकांश ने सरयू की राह ली और पुण्यसलिला में डुबकी लगाने के बाद प्रमुख मंदिरों की ओर रुख किया।

..तो बुधवार की मध्य रात से सुबह तक परिक्रमा पूरी करने वाले निढाल थे। वे किसी तरह अपने ठौर की ओर लौटते दिखे। दिन चढ़ने के साथ रामनगरी की परिधि तो रिक्त हो गई पर आंतरिक मार्ग पट गए। रामजन्मभूमि, कनकभवन, हनुमानगढ़ी जैसे आस्था के प्रमुख केंद्रों पर तिल तक रखने की जगह नहीं थी। मणिरामदासजी की छावनी, दशरथमहल बड़ास्थान, रामवल्लभाकुंज, लक्ष्मणकिला आदि दर्जनों प्रमुख मंदिर आस्था की गहमा-गहमी में डूबे रहे। मध्याह्न मंदिरों कापट बंद होने के साथ श्रद्धालुओं ने पेट-पूजा की ओर ध्यान दिया। इसके बाद चंद घंटे विश्राम के नाम थे। युवा दिनेशलाल जैसे भी श्रद्धालु रहे, जो सुबह परिक्रमा पूरी करने के साथ बिस्तर पर पड़े तो पूरे 12 घंटे बाद उठे। उनकी मानें तो इस दौरान शारीरिक एवं मानसिक थकान भी दूर हुई। यह अकेले दिनेशलाल का ही नहीं तकरीबन सभी श्रद्धालुओं के रुख से बयां हुआ। वे दूसरी बेला में अपूर्व उल्लास के साथ मंदिरों की ओर आस्था निवेदित करने निकले। इस दौरान जगह-जगह कथा-प्रवचन और भजन-कीर्तन भी माहौल में चार-चांद लगाते रहे। ------------------ पौराणिक स्थलों से गुजरी 14कोसी परिक्रमा

-रामनगरी की 14कोसी परिक्रमा की परिधि में रामनगरी सहित नवाबों की पुरानी राजधानी फैजाबाद शहर, पौराणिक महत्व का सूर्यकुंड, जनौरा गांव (मान्यता है कि बेटी-दामाद से मिलने आए राजा जनक यहीं रुके थे), भगवान राम के स्वधाम गमन का स्मारक गुप्तारघाट, संपूर्ण कैंट क्षेत्र सहित नगरी से स्पर्शित सरयू का बड़ा हिस्सा शामिल होता है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि में अयोध्या की 14कोसी परिक्रमा का विधान है। ------------------------ पंचकोसी परिक्रमा आज, मुहूर्त सुबह 10:06 बजे से -प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी के मुहूर्त में होने वाली पंचकोसी परिक्रमा गुरुवार को सुबह 10:06 बजे से शुरू होगी। परिक्रमा का मुहूर्त शुक्रवार को मध्याह्न 12:16 बजे तक है। पंचकोसी परिक्रमा रामनगरी की निकटतम परिधि मानी जाती है। इस परिधि में विशुद्ध रूप से रामनगरी का वह हिस्सा शामिल है, जो मठ-मंदिरों, संतों और पौराणिक सरोवरों से आच्छादित है। इस परिक्रमा में स्थानीय श्रद्धालुओं का आधिक्य रहता है। इसमें भी शामिल होने के लिए दूर-दराज तक से श्रद्धालु उमड़ते हैं। ------------------------- बही रामकथा की रसधार

- रामकोट स्थित अपने आश्रम पर कार्तिक माह एवं परिक्रमा महात्म्य तथा रामकथा पर केंद्रित प्रवचन आगे बढ़ाते हुए दिग्गज रामकथा मर्मज्ञ राममंगलदास रामायणी ने शिव-पार्वती एवं सीता-राम विवाह की तात्विकता परिभाषित की। कहा, यह विवाह अस्तित्व के मंगल के परिचायक हैं। इसके मूल में संसार, समाज एवं राष्ट्रहित करने वाली संतानोत्पत्ति की कामना थी। कथाव्यास ने शास्त्रीय मान्यताओं का उल्लेख करते हुए यह भी परिभाषित किया, जो कथा का श्रवण नहीं करता वह संत और सज्जन नहीं है। ---------------------- मंत्री ने कहा, अयोध्या सम्मान-स्वाभिमान का केंद्र -रामनगरी में उमड़ रही आस्था के बीच प्रदेश के परिवहन मंत्री अशोक कटारिया भी पहुंचे। उन्होंने महापौर ऋषिकेश उपाध्याय एवं विधायक वेदप्रकाश गुप्त के साथ रामजन्मभूमि सहित हनुमानगढ़ी एवं कनकभवन का दर्शन किया। इस दौरान मीडिया से अनौपचारिक भेंट में उन्होंने कहा, अयोध्या आस्था ही नहीं सम्मान-स्वाभिमान का केंद्र है। अयोध्या के लिए जो संभव होगा, वह किया जाएगा। मंत्री ने कहा, मंदिर-मस्जिद का फैसला न्यायालय में है और जो भी फैसला आए, उसे मान्य होना चाहिए। इस मौके पर जिला भाजपाध्यक्ष अवधेश पांडेय बादल, महानगर महामंत्री परमानंद मिश्र, युवा भाजपा नेता आकाशमणि आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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