संवादसूत्र, उदी : एनएच-92 इटावा-ग्वालियर मार्ग एवं थाना बढ़पुरा के ग्राम उदी के समीप उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश सीमा को जोड़ने वाले चंबल पुल के पिलर संख्या 6 का बेयरिग क्षतिग्रस्त होने के कारण जिला प्रशासन के निर्देश पर क्षेत्रीय पुलिस द्वारा पुल पर बुधवार आधी रात से भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। पुलिस द्वारा कस्बा उदी मोड़ से सभी भारी वाहनों को चकरनगर एवं वाह-आगरा मार्ग की तरफ डायवर्ट किये जा रहे हैं तो वहीं मध्य प्रदेश सीमा में पुलिस जवानों को लगाने के साथ बरही टोल पर भी भारी वाहनों की पासिग पर रोक लगाई गई है।

ज्ञात हो कि बुधवार को चंबल पुल पर इटावा की ओर से पिलर संख्या छह के दक्षिणी हिस्से पर स्थापित रोलर बेयरिग के क्षतिग्रस्त होने की सूचना के बाद एनएच-92 राष्ट्रीय मार्ग खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता द्वारा इसकी जानकारी जिलाधिकारी श्रुति सिंह को देते हुए भारी वाहनों के आवागमन एवं पुल की सुरक्षा की मांग की गई थी। जिस पर जिला प्रशासन द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए थाना बढ़पुरा पुलिस के साथ ही जनपद के अन्य थानों के फोर्स को पुल की सुरक्षा एवं भारी वाहनों के आवागमन को बंद किए जाने के आदेश निर्देश जारी किए गए थे। थाना बढ़पुरा प्रभारी प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक सौरभ सिंह द्वारा एसआइ ब्रजेश सिंह, एसआइ गीतम सिंह, उदी चौकी प्रभारी विवेक कुमार एवं अतिरिक्त पुलिस फोर्स के साथ बुधवार की रात बारह बजे के बाद से ही चंबल पुल पर आने व जाने वाले सभी भारी वाहनों के आवागमन को रोक दिया गया।

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तीन वर्षों में आठ बार क्षतिग्रस्त हो चुका है पुल

उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की सीमा को जोड़ने वाला एवं लिपुलेक मुंबई जैसे लंबे व अतिव्यस्त मार्ग पर स्थापित यह अति महत्वपूर्ण पुल वर्ष 2018 मई के बाद से अब तक आठ बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। जबकि उक्त पिलर संख्या 6 की उपरोक्त बेयरिग तीसरी बार क्षतिग्रस्त हुई है। 11 मई 2018 में इसी बेयरिग के क्षतिग्रस्त होने के बाद पुल पर 20 जून यानी एक माह से अधिक समय के लिए संपूर्ण आवागमन बंद रहा था। जबकि दूसरी बार 29 नवंबर 2019 को इसी बेयरिग के क्षतिग्रस्त होने से पंद्रह दिन से अधिक यानी 17 दिसंबर 2019 को खोला जा सका था। आज पुन: तीसरी बार यही पिलर संख्या 6 की दक्षिणी बेयरिग खराब हो गई है।

इसके अलावा 23 दिसंबर 2018 को पिलर संख्या 2-3 के बीच डेक स्लैब के क्षतिग्रस्त होने के बाद 6 अप्रैल को आठवें डेक स्लैब के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन रोका गया था। 18 जुलाई 2019 पुन: इसी डेक स्लैब के क्षतिग्रस्त होने पर एवं अगस्त 2019 में डेक स्लैब के क्षतिग्रस्त होने के बाद लोहे की प्लेट स्थापित की गयी थी। चंबल पुल वर्ष 2018 से पूर्व भी कई बार क्षतिग्रस्त हो चुका है।

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पुल के क्षतिग्रस्त होने से जनता को होती है भारी परेशानी

चंबल पुल के बार बार खराब होने से आम जनता एवं मरीजों को जहां टुकड़ों में सफर करने के साथ आर्थिक दोहन का शिकार होना पड़ता है। तो वहीं मरीजों को जिदगी और मौत के बीच जूझना पड़ता है। वाहन चालकों, मालिकों को भी लंबे चक्कर लगाने से आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है। सभी को 50 से 100 किलोमीटर का चक्कर लगाने के साथ टूटी फूटी सड़कों एवं अति बीहड़ी क्षेत्रों से होकर यात्रा करने को विवश होना पड़ता है।

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मरम्मत में लग सकते हैं दस से बारह दिन

एनएच-92 के सहायक अभियंता एससी शर्मा का कहना है कि पिलर संख्या 6 की दक्षिणी बेयरिग क्षतिग्रस्त हो गयी है। जिसकी मरम्मत हेतु बाहर से टीम को बुलाया गया है। मरम्मत टीम के आने के बाद क्षतिग्रस्त बियरिग की स्थिति का पता लगाने के साथ मरम्मत का काम शुरू किया जायेगा। जिसमें संभवत: 10 से 12 दिन लग सकते हैं। मरम्मत होने के बाद ही भारी वाहनों का आवागमन शुरू हो सकेगा।

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पुल की मियाद पूरी हो गई

सहायक अभियंता ने बताया कि बार-बार पुल एवं बेयरिग आदि के क्षतिग्रस्त होने के कारण पर उनके द्वारा बताया गया कि पुराने तकनीक के अनुसार कम भार क्षमता के हिसाब से बने उक्त पुल पर अधिक भार वाहनों का आवागमन होने से अधिक टूट फूट तो होती ही आ रही है। इसी के साथ पुल की मियाद पूरी हो गयी है सीमेंट व सरिया का संपर्क छूट रहा है। पुल का पूर्व में ही सर्वे कराने के बाद पुल को रिजेक्ट करते हुए नए पुल की मांग भी की जा चुकी है। शासन को नए पुल निर्माण का कई बार प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है।

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