संवाद सहयोगी, सैफई (इटावा) : सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के गांव सैफई में प्रधान चुनने को पहली बार वोट पड़े हैं। प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद मुलायम के करीबी बुजुर्ग रामफल वाल्मीकि का नाम समाजवादी परिवार ने तय कर दिया था, लेकिन मुकाबले में 32 वर्षीय विनीता के सामने आने से निर्विरोध निर्वाचन की परंपरा पर ब्रेक लग गया। सैफई के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज स्थित मतदान केंद्र पर वोट डालने के लिए सुबह से ही कतारें लगी रहीं।

सपा नेता और बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेद्र यादव, उनके पिता अभयराम सिंह यादव, प्रसपा के राष्ट्रीय महासचिव आदित्य यादव और उनकी पत्नी राजलक्ष्मी सुबह ही मतदान केंद्र पर पहुंच गई थीं। करीब 11 बजे निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव अपनी पत्नी स्वीटी यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमलता यादव, सैफई की ब्लॉक प्रमुख मृदुला यादव पहुंचीं। दोपहर बाद प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने भी वोट डाला।

इससे पहले सैफई गांव में हमेशा निर्विरोध प्रधान निर्वाचित होता रहा। वर्ष 1971 से लगातार प्रधान चुने जा रहे दर्शन सिंह यादव का पिछले साल 17 अक्टूबर 2020 को निधन हो गया था। इस बार चुनाव लड़ रहे रामफल भी दर्शन सिंह की तरह ही मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी हैं। गांव के रामप्रकाश दुबे दावा करते हैं कि रामफल के सिर पर ही प्रधानी का सेहरा सजेगा। दशरथ सिंह यादव कहते हैं कि रामफल उनके चाचा समान हैं। सबने एकमत होकर उन्हें प्रधान बनाने को वोट डाले हैं। वहीं, रामफल कहते हैं कि वह 1967 से मुलायम सिंह यादव की सेवा में रहे हैं। उनके साथ क्रांति रथ में भी घूम चुके हैं। उनकी पत्नी कई बार जिला पंचायत सदस्य रहीं हैं।

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विनीता के पीछे परिवार के ही किसी व्यक्ति की शह

रामफल के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरीं विनीता साधारण किसान परिवार से हैं। उनके पति भूपेंद्र सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। माना जा रहा है कि उनके चुनाव लड़ने के पीछे मुलायम परिवार के ही किसी व्यक्ति की शह है।