40 साल बाद दबंगों के चंगुल से छूटी इटावा के किसान की जमीन, खेत में पैर रखते ही छलके खुशी के आंसू
उत्तर प्रदेश में भूमाफियाओं के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत इटावा में किसानों को दशकों बाद अपनी अवैध कब्जे वाली जमीन वापस मिली है।

किसान रमेश कुमार और मसनाई गांव में रमेश कुमार के खेत पर खड़ी फसल
HighLights
भूमाफिया अभियान से इटावा में किसानों को मिली अपनी जमीन।
रमेश कुमार और जागेश्वर को दशकों बाद मिली जमीन।
कब्जा मुक्त जमीन से किसानों के परिवारों की आजीविका बहाल हुई।
जागरण संवाददाता, इटावा। उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा भूमाफियाओं और जमीनों पर अवैध कब्जे हटवाने के लिए चलाए जा रहे अभियान असर अब जमीन पर दिख रहा है। जिस जमीन पर कभी दबंगों का कब्जा था, आज उसी खेत में किसान अपने परिवार का भविष्य संवार रहे हैं।
वर्षों तक शिकायतों और इंतजार के बाद जब प्रशासन की कार्रवाई से जमीन वापस मिली तो किसानों के चेहरे पर सुकून लौट आया। जिले में ऐसे दो मामले सामने आए हैं, जहां लंबे समय से कब्जे में रही किसानों की भूमि को मुक्त कराया गया। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन की सक्रियता से उन्हें वर्षों बाद अपनी जमीन का हक मिल सका है। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया है।
40 साल बाद छह बीघा जमीन पर लौटा मालिकाना हक
ग्राम पंचायत मसनाई निवासी भुर्जी समाज के किसान रमेश कुमार के अनुसार उनकी करीब आठ बीघा भूमि पर लगभग 40 वर्ष से दबंगों का कब्जा था। उनका कहना है कि उनके पिता सीधे-सादे थे, जिसका फायदा उठाकर दबंगों ने उन्हें डराकर जमीन पर कब्जा कर लिया और खेती करते रहे। परिवार की ओर से अलग-अलग समय पर शिकायतें भी की गईं, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी।
रमेश कुमार के मुताबिक, भाजपा आईटी सेल के प्रभारी शरद तिवारी की मदद और जिला प्रशासन की सक्रियता के बाद उनकी छह बीघा भूमि कब्जा मुक्त कराई गई। वर्षों बाद जब जमीन उनके परिवार के उपयोग में आई तो खेती के जरिये परिवार का भरण-पोषण आसान हुआ। रमेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनके लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।
28 साल का इंतजार भी खत्म
इसी तरह संतोषपुर पचार निवासी जागेश्वर सक्सेना ने बताया कि उनकी 10 बीघा भूमि पर वर्ष 1997 से कब्जा था। उनके अनुसार परिवार लंबे समय से जमीन वापस पाने के लिए प्रयास कर रहा था।
उनका आरोप है कि उनके पिता की सरलता का फायदा उठाकर कुछ लाेगों ने भूमि पर कब्जा कर खेती शुरू कर दी थी। जागेश्वर के मुताबिक, प्रशासन की कार्रवाई और उनकी आठ बीघा भूमि कब्जा मुक्त कराई गई। जमीन वापस मिलने के बाद अब परिवार खेती कर अपनी आजीविका चला रहा है। उन्होंने भी सरकार और प्रशासन के प्रति आभार जताया।
दबंगई के साये से निकलकर खेतों तक पहुंची उम्मीद
भाजपा के आईटी सेल प्रभारी शरद तिवारी ने बताया कि किसानों ने अपनी बात भाजपा कार्यालय में रखी तो उनकी मदद की गई। जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं होती, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आजीविका का सबसे बड़ा आधार होती है।
सरकार की ओर से भूमाफिया और अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई का अभियान चलाए जाने के बीच जिले के ये मामले उन लोगों के लिए उम्मीद की मिसाल बनकर सामने आए हैं, जो अपनी जमीन पर अवैध कब्जे से परेशान हैं।
